सुप्रीम कोर्ट की कड़ी चेतावनी: अमीर आरोपियों की कानूनी पैंतरेबाजी अब नहीं चलेगी
सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी
नई दिल्ली, 7 जनवरी 2026: सुप्रीम कोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामलों में अमीर और प्रभावशाली आरोपियों की आदतों पर कड़ी टिप्पणी की है। न्यायालय ने कहा कि ये आरोपी ट्रायल का सामना करने के बजाय कानून की वैधता को चुनौती देकर सिस्टम को दरकिनार करने का प्रयास करते हैं, लेकिन अब यह स्वीकार्य नहीं होगा।
अगस्ता वेस्टलैंड वीवीआईपी हेलीकॉप्टर घोटाले से संबंधित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोपी वकील गौतम खैतान की याचिका पर सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता में बेंच ने यह बात कही। बेंच में जस्टिस जेबी पारदीवाला भी शामिल थे। खैतान ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) की धारा 44(1)(c) को चुनौती दी थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया।
सीजेआई ने कहा, "यह एक नया ट्रेंड बन गया है कि अमीर और प्रभावशाली आरोपी ट्रायल के दौरान कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाते हैं। क्या सिर्फ इसलिए कि मैं अमीर हूं, मैं कानून को चुनौती दूंगा? नहीं, ऐसा नहीं चलेगा। यदि आप आरोपी हैं, तो आम नागरिक की तरह ट्रायल का सामना करें।"
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि PMLA के प्रावधानों को चुनौती देने वाली कई याचिकाएं पहले से लंबित हैं, इसलिए इस मामले में अलग से सुनवाई की आवश्यकता नहीं है। बेंच ने खैतान की याचिका को सुनवाई योग्य मानते हुए खारिज कर दिया।
यह टिप्पणी उस समय आई है जब मनी लॉन्ड्रिंग और आर्थिक अपराधों के मामलों में प्रभावशाली लोग अक्सर कानूनी प्रक्रिया को लंबा खींचने का प्रयास करते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट का यह रुख न्यायिक प्रक्रिया को तेज करने और कानून के समक्ष सभी की समानता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
