सुप्रीम कोर्ट की आवारा कुत्तों पर सख्त टिप्पणी: इंसानों के लिए नहीं आते इतने आवेदन

सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के मामलों में दायर याचिकाओं की संख्या पर चौंकाने वाली टिप्पणी की है। न्यायालय ने कहा कि इंसानों के लिए भी इतने आवेदन नहीं आते। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने इस मुद्दे पर चर्चा की, जिसमें वकीलों ने एक अंतरिम याचिका प्रस्तुत की। कोर्ट ने पिछले साल आवारा कुत्तों को नसबंदी और टीकाकरण के बाद शेल्टर होम्स में स्थानांतरित करने का आदेश दिया था। जानें इस मामले में आगे क्या होने वाला है।
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सुप्रीम कोर्ट की आवारा कुत्तों पर सख्त टिप्पणी: इंसानों के लिए नहीं आते इतने आवेदन

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी पर चर्चा

सुप्रीम कोर्ट की आवारा कुत्तों पर सख्त टिप्पणी: इंसानों के लिए नहीं आते इतने आवेदन

आवारा कुत्तों के मुद्दे पर SC की सख्त टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को आवारा कुत्तों से संबंधित मामलों में दायर याचिकाओं पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। न्यायालय ने कहा कि इस तरह के आवेदन तो इंसानों के लिए भी नहीं आते। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने यह टिप्पणी तब की जब दो वकीलों ने इस मुद्दे को उठाया। वकील ने बताया कि उन्होंने इस मामले में एक अंतरिम याचिका प्रस्तुत की है।

इस पर जस्टिस मेहता ने कहा कि कुत्तों के लिए याचिकाएं इंसानों की तुलना में अधिक आ रही हैं। आमतौर पर इंसानों से जुड़े मामलों में इतनी संख्या में आवेदन नहीं आते। जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन वी अंजारी की पीठ इस मामले की सुनवाई बुधवार को करेगी, जिसमें कई याचिकाओं पर चर्चा की जाएगी और सभी वकीलों की बात सुनी जाएगी।

पिछले साल का सुप्रीम कोर्ट का आदेश

दरअसल, कुत्तों द्वारा काटने की घटनाओं को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल 7 नवंबर को आवारा कुत्तों को नसबंदी और टीकाकरण के बाद शेल्टर होम्स में स्थानांतरित करने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इन कुत्तों को उस स्थान पर वापस नहीं छोड़ा जाएगा जहां से उन्हें पकड़ा गया था।

स्वतः संज्ञान लेने का मामला

अदालत ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे से सभी मवेशियों और अन्य आवारा जानवरों को हटाएं। सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के मामलों में स्वतः संज्ञान लेते हुए कई निर्देश जारी किए थे। उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल 28 जुलाई को आवारा कुत्तों के मामलों पर स्वतः संज्ञान लिया था। इसी संदर्भ में सुनवाई जारी है।