सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन का अधिकार
सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय सशस्त्र बलों में महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन देने के अपने पूर्व निर्णय को सही ठहराया है। यह निर्णय न केवल महिलाओं के अधिकारों को मजबूत करता है, बल्कि उन्हें पेंशन से जुड़े लाभ भी प्रदान करता है। हालांकि, वेतन के बकाया के लिए पात्र नहीं होंगे। यह कदम भारतीय सेना में लैंगिक समानता को सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
| Mar 24, 2026, 11:43 IST
महिला अधिकारियों के लिए स्थायी कमीशन का अधिकार
भारतीय सशस्त्र बलों में लैंगिक समानता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने महिला अधिकारियों को परमानेंट कमीशन (PC) देने के अपने पूर्व निर्णयों को सही ठहराया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि सेना में महिलाओं के स्थायी सेवा के अधिकार में अब कोई हस्तक्षेप नहीं होगा। सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि महिला अधिकारियों को पहले से दिया गया परमानेंट कमीशन जारी रहेगा, और मौजूदा व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण राहत देते हुए यह निर्णय सुनाया कि महिला अधिकारी, विशेषकर शॉर्ट सर्विस कमीशन अधिकारी (SSCOs) और वे लोग जिन्होंने इस मामले में दखल दिया था, जिन्हें कानूनी प्रक्रिया के दौरान किसी भी चरण में सेवा से मुक्त किया गया था, उन्हें 20 साल की सेवा पूरी कर चुका माना जाएगा। इसके परिणामस्वरूप, वे पेंशन से जुड़े लाभों की पात्रता प्राप्त करेंगी।
हालांकि, अदालत ने यह स्पष्ट किया कि पेंशन के लाभ दिए जाएंगे, लेकिन ये अधिकारी वेतन के किसी भी बकाया (arrears) के लिए पात्र नहीं होंगे।
इस निर्णय को सशस्त्र बलों में लैंगिक समानता को सुनिश्चित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है, जो भारतीय सेना में महिला अधिकारियों के अधिकारों और सेवा शर्तों को और मजबूत करता है।
