सुप्रिया सुले ने विदेशी फंडिंग बिल का किया विरोध, JPC से जांच की मांग

नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले ने 'फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) अमेंडमेंट बिल, 2026' का विरोध किया है। उन्होंने केंद्र सरकार से इस बिल को वापस लेने या इसकी जांच के लिए इसे संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजने की अपील की। सुले ने कहा कि सभी राजनीतिक दलों को इस पर चर्चा करने का अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने विदेशी फंडिंग के सकारात्मक उपयोग पर भी जोर दिया और कहा कि इसे संदेह की दृष्टि से नहीं देखना चाहिए।
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NCP की सुप्रिया सुले का बयान

नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (NCP) की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले ने 'फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) अमेंडमेंट बिल, 2026' के वर्तमान प्रारूप का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि विदेशी फंडिंग को संदेह की दृष्टि से नहीं देखना चाहिए। एक रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने केंद्र सरकार से अनुरोध किया कि या तो इस बिल को वापस लिया जाए या फिर इसकी गहन जांच के लिए इसे संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेजा जाए।


संसद में चर्चा की आवश्यकता

सुले ने कहा कि सभी राजनीतिक दलों को इस प्रस्तावित कानून पर चर्चा करने का अवसर मिलना चाहिए, क्योंकि ऐसी जानकारी है कि अगले सप्ताह संसद में इस बिल पर चर्चा हो सकती है और इसे पारित भी किया जा सकता है। शनिवार को मुंबई में पत्रकारों से बातचीत करते हुए, उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी इस बिल के मौजूदा स्वरूप से सहमत नहीं है। यदि सरकार इसे वापस नहीं लेना चाहती, तो इसे JPC के पास भेजा जाना चाहिए ताकि इसके प्रावधानों पर विस्तार से चर्चा हो सके।


लोकतंत्र में चर्चा का महत्व

एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सुले ने कहा कि एक मजबूत लोकतंत्र में, किसी चीज़ का केवल विरोध करना पर्याप्त नहीं है; हमें उस पर चर्चा भी करनी चाहिए। उन्होंने केंद्र को चेतावनी दी कि बिना व्यापक विचार-विमर्श के संसद में इस कानून को जल्दबाज़ी में पारित न किया जाए। सुले ने यह भी कहा कि विदेशी चंदे का उपयोग सही कार्यों, जैसे कि चिकित्सा और शिक्षा से जुड़े कार्यों के लिए किया जा सकता है।


विदेशी फंडिंग पर विचार

उन्होंने कहा कि जब विदेशी फंड का संबंध ड्रग तस्करी या आतंकवाद जैसी अवैध गतिविधियों से हो, तो कार्रवाई होनी चाहिए। लेकिन, सभी विदेशी फंडिंग संस्थाओं को संदेह की दृष्टि से नहीं देखना चाहिए। सुले ने गेट्स फाउंडेशन और USAID जैसी संस्थाओं का उदाहरण दिया, जो कई वर्षों से अच्छे कार्य कर रही हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि हमें विदेशी फंडिंग वाली हर संस्था को संदेह की दृष्टि से क्यों देखना चाहिए।