सुप्रिया श्रीनेत ने अमेरिका-ईरान शांति समझौते पर उठाए सवाल
कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने अमेरिका और ईरान के बीच हुए 60 दिन के शांति समझौते का समर्थन किया, लेकिन भारत सरकार की आलोचना की। उन्होंने सवाल उठाया कि भारत की इस प्रक्रिया में कोई भूमिका क्यों नहीं है, खासकर जब भारतीय नाविकों की मौत हुई। जानें इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर उनके विचार और ईरान के उप-विदेश मंत्री की टिप्पणियाँ।
| Jun 15, 2026, 20:12 IST
कांग्रेस नेता का बयान
कांग्रेस की नेता सुप्रिया श्रीनेत ने रविवार को अमेरिका और ईरान के बीच 60 दिन के शांति समझौते का समर्थन किया, साथ ही पश्चिम एशिया में संकट को सुलझाने के प्रयासों की सराहना की। हालांकि, उन्होंने भारत सरकार की आलोचना की, खासकर भारतीय नाविकों की मौत पर प्रतिक्रिया न देने के लिए। श्रीनेत ने कहा कि हम किसी भी शांति पहल का स्वागत करते हैं, क्योंकि युद्ध का असर हमेशा आम लोगों पर पड़ता है। हमारे तीन नाविक शहीद हुए, और यह अमेरिका की क्रूरता का परिणाम है। यह जानते हुए भी कि भारतीय क्रू उस जहाज पर था, हमारे प्रधानमंत्री ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी, न ही शोक व्यक्त किया।
शांति प्रक्रिया में भारत की भूमिका
श्रीनेत ने आगे कहा कि हम शांति का स्वागत करते हैं, लेकिन यह जानना चाहते हैं कि भारत की इसमें कोई भूमिका क्यों नहीं है। इतना बड़ा शांति समझौता हो रहा है, और पाकिस्तान, जो एक आतंकवादी देश है, इसमें शामिल है। वॉशिंगटन और तेहरान के बीच इस महत्वपूर्ण समझौते से पश्चिम एशिया में 'शांति और सुरक्षा' की उम्मीद है, साथ ही रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज़ जलडमरूमध्य के फिर से खुलने की संभावना भी है। ईरान के उप-विदेश मंत्री काज़ेम ग़रीबाबादी ने इस समझौते की पुष्टि की और भविष्य की बातचीत के लिए ईरान की शर्तें बताईं।
आधिकारिक हस्ताक्षर समारोह
ईरान के सरकारी प्रेस टीवी के अनुसार, ग़रीबाबादी ने बताया कि आधिकारिक हस्ताक्षर समारोह शुक्रवार को स्विट्ज़रलैंड में होगा, जिसके बाद आपसी सहमति पत्र (MoU) का टेक्स्ट सार्वजनिक किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ईरान अंतिम समझौते के लिए प्रस्तावित 60 दिनों की बातचीत में तभी शामिल होगा, जब यह सुनिश्चित हो जाएगा कि अमेरिका ने दुश्मनी खत्म करने, नाकेबंदी हटाने और ईरान की संपत्ति जारी करने के अपने वादे पूरे कर लिए हैं।
