सीपीआई (एम) ने उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले की आलोचना की
सुप्रीम कोर्ट का फैसला और सीपीआई (एम) की प्रतिक्रिया
कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) ने सुप्रीम कोर्ट के उस निर्णय की निंदा की है जिसमें उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार किया गया। पार्टी का कहना है कि गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत बिना किसी मुकदमे या दोषसिद्धि के पांच साल से अधिक समय तक हिरासत में रहना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है।
सीपीआई (एम) ने एक बयान में कहा कि लंबे समय तक हिरासत में रहना स्वतंत्रता और शीघ्र सुनवाई के संवैधानिक अधिकारों को कमजोर करता है। उन्होंने यह भी कहा कि "जमानत नियम है, जेल नहीं।" पार्टी ने यूएपीए को एक कठोर कानून बताते हुए आरोप लगाया कि इसका उपयोग असहमति की आवाजों को दबाने के लिए किया जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट का निर्णय
सुप्रीम कोर्ट ने उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार किया, जो कि 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से संबंधित एक मामले में हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि लंबे समय तक मुकदमे से पहले की हिरासत प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है।
हालांकि, कोर्ट ने गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा उर रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद को जमानत दे दी।
