सीएम योगी ने पीएम मोदी को भेंट की गुलाबी मीनाकारी से बनी राम मंदिर की अनुकृति
सीएम योगी का खास तोहफा
सीएम योगी ने पीएम मोदी को दिया ये खास तोहफा
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को गुलाबी मीनाकारी से निर्मित भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर की अनुकृति भेंट की। यह भेंट केवल औपचारिकता तक सीमित नहीं रही, बल्कि काशी की पारंपरिक कला, सनातन आस्था और ‘वोकल फॉर लोकल’ के विचार को एक साथ प्रस्तुत करने वाला सांस्कृतिक संदेश बन गई। मुख्यमंत्री की यह पहल दर्शाती है कि योगी सरकार स्थानीय शिल्प को राष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए हर संभव मंच का रचनात्मक उपयोग कर रही है।
राम मंदिर की अनुकृति का निर्माण
अयोध्या में श्रीराम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा के अवसर पर शिल्पकार कुंज बिहारी सिंह द्वारा बनाई गई गुलाबी मीनाकारी की यह अनुकृति इस शिल्प की सर्वोच्च अभिव्यक्ति है। इसमें 2 किलोग्राम चांदी और सोने का उपयोग किया गया है, साथ ही इसमें हीरे भी जड़े गए हैं। इस अनुकृति में 108 भाग हैं और इसे 108 दिनों में तैयार किया गया है। निर्माण के दौरान लगातार राम धुन का जाप किया गया। स्वर्ण से निर्मित भगवान राम, कमल और धनुष-बाण की प्रतीकात्मक डिजाइन, चार शिखरों पर जड़े हीरे और भीतर प्रकाश की व्यवस्था, यह सब सनातन परंपरा में 108 के महत्व को जीवंत रूप में प्रस्तुत करता है.
GI टैग और ODOP योजना
गुलाबी मीनाकारी को जीआई टैग मिलना इसकी मौलिक पहचान की आधिकारिक स्वीकृति है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) योजना में शामिल कर काशी के कारीगरों को संस्थागत समर्थन प्रदान किया। प्रशिक्षण, डिजाइन नवाचार, सरकारी प्रदर्शनियां और प्रोटोकॉल गिफ्टिंग के माध्यम से इस कला को नया बाजार और नई प्रतिष्ठा मिली है। इसके परिणामस्वरूप, गुलाबी मीनाकारी अब केवल स्थानीय हस्तकला नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की ब्रांड पहचान बन चुकी है।
गुलाबी मीनाकारी का वैश्विक महत्व
प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुलाबी मीनाकारी को सांस्कृतिक कूटनीति का एक प्रभावशाली माध्यम बना दिया है। 2021 में पीएम मोदी ने अमेरिकी दौरे पर तत्कालीन उपराष्ट्रपति कमला हैरिस को गुलाबी मीनाकारी का शतरंज सेट भेंट किया था। सीएम योगी ने भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन, साउथ सुपरस्टार रजनीकांत और अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला को भी गुलाबी मीनाकारी की कलाकृतियां भेंट की हैं। इससे न केवल इस शिल्प की मांग बढ़ी है, बल्कि बड़ी संख्या में महिलाओं को प्रशिक्षण देकर महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में ठोस योगदान भी हुआ है।
गुलाबी मीनाकारी की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
गुलाबी मीनाकारी भारत में 16वीं सदी में आई और धीरे-धीरे काशी की पहचान बन गई। इस कला में उपयोग होने वाले रंग मेटल ऑक्साइड से तैयार किए जाते हैं और यह मीनाकारी केवल शुद्ध चांदी और सोने पर की जाती है। लगभग 800 डिग्री सेल्सियस तापमान पर पकाई जाने वाली यह प्रक्रिया अत्यंत जटिल और श्रमसाध्य होती है। सदियों से कारीगर परिवार इस कला को सहेजते आ रहे हैं और आज भी वही परंपरा आधुनिक रूप में जीवित है.

