सिद्धारमैया ने प्रह्लाद जोशी की शिक्षा मंत्री के रूप में नियुक्ति की आलोचना की
सिद्धारमैया की तीखी प्रतिक्रिया
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने प्रह्लाद जोशी को केंद्रीय शिक्षा मंत्री के रूप में नियुक्त करने पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि इस निर्णय से कन्नड़ समुदाय को शर्मिंदगी महसूस हुई है और जोशी को तुरंत इस पद से हटाने की मांग की है। सिद्धारमैया ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि हमें गर्व होना चाहिए था कि कर्नाटक का एक सांसद देश का शिक्षा मंत्री बना है। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रह्लाद जोशी को चुना, जो एक ऐसे सांसद हैं जिन्होंने एक महिला के साथ दुष्कर्म के दोषियों का समर्थन किया था।
जोशी और प्रधान की समानता
सिद्धारमैया ने यह भी कहा कि जोशी और पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान विचारधारा के मामले में समान हैं, क्योंकि दोनों ने RSS से जुड़ी अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के माध्यम से राजनीति में कदम रखा। उन्होंने कहा कि प्रह्लाद जोशी और धर्मेंद्र प्रधान में कोई अंतर नहीं है। दोनों की सोच महिलाओं, दलितों, गरीबों और अल्पसंख्यकों के प्रति समान है। इसीलिए जोशी को प्रधान की जगह लाया गया है।
राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की मांग
सिद्धारमैया ने बताया कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा ने संसद में इस मुद्दे को उठाया है और जोशी को शिक्षा मंत्रालय से हटाने की मांग की है। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि ऐसे व्यक्ति के नेतृत्व में देश की शिक्षा व्यवस्था का भविष्य क्या होगा। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने लोकसभा में जोशी की असलियत को उजागर किया है।
प्रधानमंत्री से अपील
सिद्धारमैया ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की कि यदि उन्हें शिक्षकों और छात्रों की चिंता है, तो उन्हें तुरंत प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय से हटा देना चाहिए और इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी को किसी योग्य व्यक्ति को सौंपना चाहिए।
