सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने भूख हड़ताल खत्म करने के लिए रखीं शर्तें
सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने नीट परीक्षा के पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में धांधली के खिलाफ भूख हड़ताल जारी रखी है। उन्होंने अनशन खत्म करने के लिए तीन शर्तें रखी हैं, जिनमें शिक्षा व्यवस्था की विफलताओं पर जवाबदेही तय करना शामिल है। वांगचुक ने कहा कि यदि उनकी शर्तें पूरी नहीं होती हैं, तो उनका अनशन जारी रहेगा। जानें उनके अनशन की स्थिति और आगे की रणनीति के बारे में।
| Jul 20, 2026, 10:32 IST
सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल पर शर्तें
नीट (NEET) परीक्षा के पेपर लीक और शिक्षा प्रणाली में धांधली के खिलाफ पिछले 20 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने सोमवार को अपने अनशन को समाप्त करने के लिए तीन महत्वपूर्ण शर्तें रखी हैं। सफदरजंग अस्पताल से जारी एक हाथ से लिखे नोट में वांगचुक ने स्पष्ट किया कि वह 20 जुलाई को अपनी भूख हड़ताल तभी समाप्त करेंगे जब शिक्षा व्यवस्था की विफलताओं पर जवाबदेही तय की जाएगी या राजनीतिक दल संसद में इस मुद्दे को उठाने का लिखित आश्वासन देंगे।
भूख हड़ताल खत्म करने के लिए वांगचुक ने रखीं 3 शर्तें
सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक नोट में, वांगचुक ने उन तीन शर्तों का उल्लेख किया जिनके आधार पर वह अपनी भूख हड़ताल समाप्त करेंगे। उन्होंने कहा, "आप में से कई लोगों ने मुझसे पूछा है कि मैं कब अपना अनशन खत्म करूंगा। जैसा कि मैंने पहले कहा था, मैं 20 जुलाई को अपना अनशन समाप्त कर दूंगा... यदि सरकार शिक्षा व्यवस्था में हालिया विफलताओं, पेपर लीक आदि की जिम्मेदारी लेती है।"
वांगचुक ने यह भी कहा कि वह अपना अनशन तब समाप्त करेंगे "यदि CJP की लीडरशिप और मैं संसद के दरवाजे तक पहुँचते हैं, जहाँ सम्मानित सांसद और विभिन्न पार्टियों के नेता हमें आश्वासन देते हैं कि वे इस मुद्दे को संसद में उठाएंगे।"
उनके नोट में लिखा था, "यदि मेरी सेहत या अन्य कारणों से ऐसा संभव नहीं हो पाता है, तो सम्मानित सांसद और विभिन्न पार्टियों के नेता इस अस्पताल में आकर उपरोक्त आश्वासन दें।"
भूख हड़ताल जारी रखने की चेतावनी
एक्टिविस्ट ने कहा कि यदि उनकी शर्तें पूरी नहीं होती हैं, तो उनका अनशन जारी रहेगा। नोट में कहा गया, "मेरी सेहत कैसी भी हो, 'संसद चलो' मार्च के बाद भी मेरा अनशन जारी रहेगा और इसे केवल इन शर्तों के पूरा होने पर ही समाप्त किया जाएगा।"
वांगचुक ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें सफदरजंग अस्पताल में "गैर-कानूनी हिरासत" में रखा गया है। उन्होंने कहा, "...सफदरजंग अस्पताल में गैर-कानूनी हिरासत में, जहाँ मेरी आवाजाही, बोलने और बातचीत करने की स्वतंत्रता पर रोक लगी हुई है।"
वांगचुक का अनशन और प्रदर्शन
यह उल्लेखनीय है कि वांगचुक ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके के विरोध प्रदर्शन में भाग लिया था और 28 जून को जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की थी।
CJP के प्रदर्शनकारी प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों (जैसे पेपर लीक) के बाद शिक्षा क्षेत्र में जवाबदेही और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। 21 दिनों के उपवास के बाद तबीयत बिगड़ने पर दिल्ली पुलिस ने एक्टिविस्ट को 18 जुलाई की सुबह सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया। उनके समर्थकों का आरोप है कि वांगचुक को विरोध स्थल से ज़बरदस्ती हटाया गया और उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया, जबकि दिल्ली पुलिस का कहना है कि उन्हें चिकित्सा कारणों से अस्पताल ले जाया गया था।
WHEN WILL I END THE FAST….!
— Sonam Wangchuk (@Wangchuk66) July 20, 2026
Not withstanding my health my fast continues till after the Sansad Chalo March, and will be broken only under the following circumstances… pic.twitter.com/kaOGx2Nk4T
