साइबर ठगी के नए तरीके: AI का उपयोग कर रहे ठग
साइबर अपराध की नई चुनौतियाँ
देश में साइबर अपराध के नए तरीके तेजी से उभर रहे हैं, जिसमें ठग अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का सहारा लेकर लोगों की पहचान चुराने लगे हैं। हाल के मामलों में फेस और वॉइस क्लोनिंग जैसे अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है, जिससे लोगों को ठगना आसान हो गया है। साइबर विशेषज्ञों का मानना है कि ये स्कैम पहले से कहीं अधिक खतरनाक और पहचानने में कठिन होते जा रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, ठग सोशल मीडिया, वीडियो कॉल या रिकॉर्डेड ऑडियो का उपयोग करके किसी व्यक्ति की आवाज और चेहरे की नकल कर लेते हैं। इसके बाद, वे उस व्यक्ति की तरह बात करके उसके रिश्तेदारों, दोस्तों या बैंकिंग सिस्टम को धोखा देने का प्रयास करते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि अब AI टूल्स की मदद से कुछ सेकंड की आवाज या कुछ फोटो से वॉइस क्लोनिंग और फेस डिपफेक तैयार किए जा सकते हैं, जिससे आम लोग आसानी से धोखे में आ जाते हैं।
हाल ही में कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां लोगों को उनके परिचित बनकर कॉल किया गया और पैसे की मांग की गई। आवाज इतनी असली होती है कि कई लोग ठगी का शिकार हो गए।
साइबर ठगी से बचने के लिए 10 महत्वपूर्ण सावधानियाँ
- अनजान कॉल या मैसेज पर तुरंत भरोसा न करें
- पैसे मांगने वाले कॉल की हमेशा अलग माध्यम से पुष्टि करें
- किसी भी OTP या बैंक डिटेल को किसी से साझा न करें
- सोशल मीडिया पर अपनी निजी जानकारी सीमित रखें
- वीडियो कॉल में संदिग्ध व्यवहार पर सतर्क रहें
- AI या फर्जी लिंक वाले मैसेज पर क्लिक न करें
- दोस्त या रिश्तेदार की आवाज में भी पैसे मांगने पर सावधानी बरतें
- टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन जरूर एक्टिव रखें
- एंटीवायरस और सिक्योरिटी ऐप्स अपडेट रखें
- किसी भी साइबर फ्रॉड की तुरंत पुलिस या साइबर सेल में शिकायत करें
कैसे हो रहा है यह नया स्कैम?
साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, AI तकनीक की मदद से ठग किसी भी व्यक्ति की सोशल मीडिया प्रोफाइल से डेटा लेकर उसकी आवाज और चेहरे की नकल बना सकते हैं। इसके बाद, वीडियो कॉल या ऑडियो मैसेज के जरिए लोगों को भ्रमित किया जाता है।
विशेषज्ञों की चेतावनी
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि आने वाले समय में ऐसे स्कैम और बढ़ सकते हैं, इसलिए डिजिटल सतर्कता बेहद जरूरी है। लोगों को सलाह दी गई है कि किसी भी डिजिटल अनुरोध को बिना पुष्टि के स्वीकार न करें।
फिलहाल, साइबर सुरक्षा एजेंसियां ऐसे मामलों पर लगातार नजर रख रही हैं और लोगों को जागरूक करने के लिए अभियान भी चला रही हैं।
