सहारनपुर के हर्षित धीमान ने जूडो में जीता स्वर्ण, बहन के त्याग की कहानी
सहारनपुर की प्रेरणादायक कहानी
सहारनपुर: उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से एक प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जो खेल और पारिवारिक समर्पण का एक नया उदाहरण प्रस्तुत करती है। हकीकत नगर के 18 वर्षीय हर्षित धीमान ने जूडो में स्वर्ण पदक जीतकर न केवल अपने शहर का बल्कि पूरे देश का नाम रोशन किया है। हर्षित की यह उपलब्धि केवल एक पदक नहीं है, बल्कि उनकी बहन लक्ष्मिता के त्याग और अटूट विश्वास की जीत है, जिसने कठिन परिस्थितियों में भी अपने भाई के सपनों को टूटने नहीं दिया।
बहन के संघर्ष से मिली सफलता की उड़ान
हर्षित के जीवन में बदलाव तब आया जब वह केवल 8 साल के थे और उन्होंने अपने पिता को कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के कारण खो दिया। पिता के बिना परिवार को संभालने की जिम्मेदारी उनकी बड़ी बहन लक्ष्मिता ने उठाई। लक्ष्मिता ने अपने सपनों को पीछे छोड़ते हुए दिन में प्राइवेट नौकरी की, ताकि भाई के जूडो अभ्यास, डाइट और ट्रेनिंग का खर्च उठा सकें। लक्ष्मिता के इस त्याग ने हर्षित को वह प्रेरणा दी, जिससे वह आज नेशनल स्तर पर चैंपियन बन गए हैं।
कजाकिस्तान एशिया कप में भारत का करेंगे प्रतिनिधित्व
हर्षित की प्रतिभा को उनके कोच जोंटी ने पहचाना और निखारा। जिला और राज्य स्तर पर लगातार स्वर्ण पदक जीतने के बाद, हाल ही में भोपाल में हुए ट्रायल में हर्षित ने शानदार प्रदर्शन किया। इस जीत के साथ उनका चयन ‘जूडो एशिया कप’ के लिए हुआ है, जो कजाकिस्तान में आयोजित होने जा रहा है। हर्षित ने कहा, “जूडो ने मेरी पूरी जिंदगी बदल दी है। जब मैं कजाकिस्तान में भारत की जर्सी पहनकर मैट पर उतरूंगा, तो मेरी बहन की हर कुर्बानी और मां का संघर्ष मेरी आंखों के सामने होगा।”
मां को बेटे की उपलब्धि पर गर्व
बेटे की इस अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि पर मां संजना धीमान भावुक होकर कहती हैं, “जूडो ने मेरे बेटे को एक नई दिशा और पहचान दी है।” हर्षित का लक्ष्य अब केवल एशिया कप तक सीमित नहीं है, बल्कि वह भविष्य में ओलंपिक में देश के लिए पदक जीतना चाहते हैं। सहारनपुर के इस प्रतिभाशाली खिलाड़ी की सफलता आज पूरे मोहल्ले और जिले के लिए गर्व का विषय बन गई है।
