सहारनपुर के किसान ने गोबर से कमाई का नया तरीका खोजा

सहारनपुर के मेहरवानी गांव के किसान आदित्य त्यागी ने गोबर से उपले बनाकर लाखों रुपये कमाने का अनोखा तरीका खोजा है। उन्होंने ऑर्गेनिक खेती और देसी गायों के पालन को अपनाया है। उनकी बिक्री में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का उपयोग करने से जबरदस्त वृद्धि हुई है। पिछले 8 महीनों में, उन्होंने गोबर से बने उत्पादों की बिक्री से 8 से 9 लाख रुपये की कमाई की है। जानें कैसे आदित्य ने पारंपरिक संसाधनों को आधुनिक मार्केटिंग के साथ जोड़कर सफलता हासिल की।
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किसान की अनोखी पहल

सहारनपुर के किसान ने गोबर से कमाई का नया तरीका खोजा


सहारनपुर के मेहरवानी गांव के निवासी आदित्य त्यागी ने यह साबित कर दिया है कि सही संसाधनों का उपयोग करके किसान अपनी आय बढ़ा सकते हैं। फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर के पद से रिटायर होने के बाद, उन्होंने ऑर्गेनिक खेती और देसी गायों के पालन की दिशा में कदम बढ़ाया। आज, वे देसी गायों के गोबर से बने उपले और कंडे बेचकर लाखों रुपये कमा रहे हैं।


गोबर से अधिक आय

आदित्य त्यागी ने बताया कि वे केवल दूध बेचने पर निर्भर नहीं हैं, बल्कि गायों के गोबर से अधिक लाभ कमा रहे हैं। वे गोबर से छोटे उपले और कंडे बनाते हैं, जिन्हें माला के रूप में तैयार किया जाता है। 350 ग्राम वजन की 20-21 उपलों की एक माला 290 रुपये में बिकती है। इस प्रकार, जो गोबर सामान्यतः बेकार समझा जाता है, वही उनके लिए 'सोना' बन गया है।


ऑनलाइन बिक्री में वृद्धि

आदित्य ने पहले ऑफलाइन बिक्री की, लेकिन हाल ही में उन्होंने ऑनलाइन बिक्री शुरू की, जिससे उन्हें शानदार प्रतिक्रिया मिली। पिछले तीन दिनों में उन्होंने 9 हजार रुपये के उपले बेचे हैं, यानी प्रतिदिन लगभग 3 हजार रुपये की बिक्री हो रही है। होली के मौसम में मांग इतनी अधिक है कि ऑर्डर पूरे करना चुनौतीपूर्ण हो गया है, खासकर हैदराबाद से।


गोबर की गुणवत्ता और बिक्री

आदित्य के पास 6 से 7 देसी नस्ल की गायें हैं, जैसे साहीवाल, थारपारकर, गंगा तिहरी और गिर। इन गायों के शुद्ध गोबर से उपले और कंडे बनाए जाते हैं। उनका मानना है कि देसी गायों के गोबर से बने कंडे धार्मिक कार्यों में अधिक उपयोगी होते हैं और पर्यावरण के लिए भी फायदेमंद हैं।


पिछले 8 महीनों में, आदित्य ने गोबर से बने उत्पादों की बिक्री से 8 से 9 लाख रुपये तक की कमाई की है। यह दर्शाता है कि सही दृष्टिकोण और नवाचार से साधारण चीजें भी आय का बड़ा स्रोत बन सकती हैं।


देसी और जर्सी गायों की तुलना

आदित्य का मानना है कि आजकल लोग जर्सी गायों को प्राथमिकता दे रहे हैं, जो विभिन्न नस्लों का मिश्रण हैं। लेकिन वे मानते हैं कि देसी गायों का महत्व अलग है और उनके उत्पादों की गुणवत्ता भी बेहतर होती है। उनकी सफलता यह दर्शाती है कि पारंपरिक संसाधनों को आधुनिक मार्केटिंग के साथ जोड़कर किसान आत्मनिर्भर बन सकते हैं।