सहारनपुर के किसान ने गोबर से कमाई का नया तरीका खोजा
किसान की अनोखी पहल
सहारनपुर के मेहरवानी गांव के निवासी आदित्य त्यागी ने यह साबित कर दिया है कि सही संसाधनों की पहचान और उपयोग से किसान अपनी आय को बढ़ा सकते हैं। फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर के पद से रिटायर होने के बाद, उन्होंने ऑर्गेनिक खेती और देसी गायों के पालन की दिशा में कदम बढ़ाया। आज, वे देसी गायों के गोबर से बने उपले और कंडे बेचकर लाखों रुपये कमा रहे हैं।
गोबर से अधिक आय
आदित्य त्यागी का कहना है कि वे केवल दूध बेचने पर निर्भर नहीं हैं, बल्कि गायों के गोबर से अधिक लाभ कमा रहे हैं। वे गोबर से छोटे उपले और कंडे बनाते हैं, जिन्हें माला के रूप में तैयार किया जाता है। 350 ग्राम वजन की 20-21 उपलों की एक माला 290 रुपये में बिकती है। इस प्रकार, जो गोबर सामान्यतः बेकार समझा जाता है, वही उनके लिए एक महत्वपूर्ण आय का स्रोत बन गया है।
ऑनलाइन बिक्री में वृद्धि
आदित्य ने बताया कि पहले वे केवल ऑफलाइन बिक्री करते थे, लेकिन हाल ही में उन्होंने ऑनलाइन बिक्री शुरू की है, जिससे उन्हें शानदार प्रतिक्रिया मिली है। पिछले तीन दिनों में उन्होंने 9 हजार रुपये के उपले बेचे हैं, यानी प्रतिदिन लगभग 3 हजार रुपये की बिक्री हो रही है। होली के मौसम में मांग इतनी अधिक है कि ऑर्डर पूरे करना चुनौतीपूर्ण हो गया है, विशेषकर हैदराबाद से।
देसी गायों का महत्व
आदित्य के पास 6 से 7 देसी नस्ल की गायें हैं, जैसे साहीवाल, थारपारकर, गंगा तिहरी और गिर। इन गायों के गोबर से उपले और कंडे बनाए जाते हैं। उनका मानना है कि देसी गायों का गोबर हवन और धार्मिक कार्यों में अधिक उपयोगी होता है और यह पर्यावरण के लिए भी फायदेमंद है।
आर्थिक सफलता
पिछले 8 महीनों में, आदित्य ने देसी गायों के गोबर से बने उत्पादों की बिक्री से 8 से 9 लाख रुपये तक की कमाई की है। उन्होंने यह साबित कर दिया है कि सही दृष्टिकोण और नवाचार से सामान्य चीजें भी आय का बड़ा स्रोत बन सकती हैं।
देसी बनाम जर्सी गाय
आदित्य का मानना है कि आजकल लोग जर्सी गायों को प्राथमिकता दे रहे हैं, जो विभिन्न नस्लों का मिश्रण हैं। लेकिन वे मानते हैं कि देसी गायों का महत्व अलग है और उनके उत्पादों की गुणवत्ता भी बेहतर होती है। उनकी सफलता यह दर्शाती है कि पारंपरिक संसाधनों को आधुनिक मार्केटिंग के साथ जोड़कर किसान आत्मनिर्भर बन सकते हैं।
