समाजवादी पार्टी का पीडीए पंचांग 2026: भाजपा की आलोचना और राजनीतिक विवाद

समाजवादी पार्टी का 'पीडीए' पंचांग 2026 राजनीतिक विवाद का कारण बन गया है, जब भाजपा ने इसमें राम मंदिर निर्माण की तिथि का उल्लेख न होने पर कड़ी आलोचना की। मनोज तिवारी ने इसे 'पाकिस्तानी कैलेंडर' करार दिया। अखिलेश यादव ने इस पंचांग का विमोचन किया, जिसमें पीडीए समुदाय से जुड़े महत्वपूर्ण तिथियों को दर्शाया गया है। समाजवादी पार्टी का कहना है कि यह पंचांग सामाजिक एकता को बढ़ावा देता है। जानें इस विवाद के पीछे की पूरी कहानी।
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समाजवादी पार्टी का पीडीए पंचांग 2026: भाजपा की आलोचना और राजनीतिक विवाद

पीडीए पंचांग पर विवाद

समाजवादी पार्टी द्वारा जारी किया गया 'पीडीए' पंचांग 2026 राजनीतिक चर्चाओं का केंद्र बन गया है। भारतीय जनता पार्टी ने इस पंचांग में राम मंदिर के निर्माण की तिथि का उल्लेख न होने पर कड़ी आलोचना की है। 'पीडीए' का अर्थ है पिछड़ा वर्ग, दलित और अल्पसंख्यक, जो समाजवादी पार्टी की राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है। भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने इस कैलेंडर पर हमला करते हुए इसे 'पाकिस्तानी कैलेंडर' कहा। उनका कहना है कि राम मंदिर की तिथि को हटाना न केवल भगवान राम का अपमान है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति का भी अपमान है। उन्होंने चेतावनी दी कि उत्तर प्रदेश की जनता इस निर्णय को स्वीकार नहीं करेगी।


पीडीए पंचांग का विमोचन

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने नए वर्ष की शुरुआत में पीडीए पंचांग का विमोचन किया। इसे पार्टी के राज्य सचिव अजय चौरसिया ने प्रकाशित किया। इस पंचांग में पीडीए समुदाय से जुड़े समाज सुधारकों और मुस्लिम बुद्धिजीवियों की जन्म और मृत्यु की तिथियों को प्रमुखता से दर्शाया गया है। अन्य धार्मिक पंचांगों की तरह, इसमें अमावस्या, पूर्णिमा, व्रत और त्योहारों की जानकारी भी शामिल है। इसके साथ ही, राष्ट्रीय त्योहारों, ऐतिहासिक दिनों और सामाजिक आंदोलनों से संबंधित महत्वपूर्ण तिथियों को भी इसमें शामिल किया गया है।


समाजवादी पार्टी का दृष्टिकोण

समाजवादी पार्टी का कहना है कि पीडीए पंचांग सामाजिक एकता और जागरूकता को बढ़ावा देता है। अखिलेश यादव ने बताया कि पीडीए समुदाय की एकता, चेतना और अधिकारों के लिए संघर्ष समाजवादी आंदोलन का मुख्य आधार है। उन्होंने यह भी कहा कि इतिहास को युवा पीढ़ी के साथ सरल और व्यवस्थित तरीके से साझा करना आवश्यक है। राम मंदिर निर्माण तिथि का उल्लेख न होने से राजनीतिक तनाव और बढ़ गया है।