संसद के मॉनसून सत्र में 'एक देश, एक चुनाव' पर कोई स्पष्टता नहीं

केंद्र सरकार ने आगामी संसद के मॉनसून सत्र में 'एक देश, एक चुनाव' लाने का कोई इरादा नहीं जताया है। विपक्षी सांसदों का मानना है कि सरकार जल्दबाज़ी में विधेयक लाने की कोशिश कर रही है। इस सत्र में महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयकों पर भी चर्चा हो सकती है, लेकिन विपक्ष का कहना है कि बिना उनकी सहमति के कोई भी विधेयक पारित नहीं हो सकता। जानें इस मुद्दे पर और क्या कहा गया है और संसद का सत्र कब शुरू होगा।
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संसद के आगामी सत्र की तैयारी

हालांकि कई विपक्षी सांसद सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (NDA) में शामिल हो चुके हैं, लेकिन केंद्र सरकार का अगले हफ्ते शुरू होने वाले संसद के मॉनसून सत्र में 'एक देश, एक चुनाव' (One Nation, One Election) लाने का कोई इरादा नहीं है। इसके अलावा, यह भी स्पष्ट नहीं है कि सरकार परिसीमन विधेयक (Delimitation Bill) और महिला आरक्षण विधेयक (Women's Reservation Bill) पेश करने की योजना बना रही है या नहीं। हालांकि, सरकार को उम्मीद है कि इस बार विपक्ष के कई सांसद इन दोनों विधेयकों का समर्थन कर सकते हैं, जिससे कांग्रेस को काफी हद तक अलग-थलग किया जा सकेगा। सूत्रों के अनुसार, सरकार की प्राथमिकता लंबित अध्यादेशों को पारित कराना है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 भी शामिल है। इस विधेयक का उद्देश्य सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की अधिकतम स्वीकृत संख्या को 33 से बढ़ाकर 37 करना है。


ONOE का विरोध

ONOE का विरोध

'एक देश, एक चुनाव' (One Nation, One Election) विधेयक पिछले साल संसद के शीतकालीन सत्र में पेश किया गया था, लेकिन इसे भाजपा सांसद पीपी चौधरी की अध्यक्षता वाली संयुक्त संसदीय समिति (JPC) को भेज दिया गया था। इस समिति का कार्यकाल 10 अगस्त तक बढ़ा दिया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई बार 'एक देश, एक चुनाव' का समर्थन किया है, यह कहते हुए कि इससे चुनावों में समय और संसाधनों की बचत होगी। हालांकि, विपक्षी नेताओं का कहना है कि सरकार जल्दबाज़ी में यह विधेयक लाने की कोशिश कर रही है और उनकी सहमति के बिना इसे पारित नहीं किया जा सकता। कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने कहा, "विपक्ष के समर्थन के बिना वे यह विधेयक कैसे ला सकते हैं? उन्हें इस पर चर्चा करनी होगी। हमें जानना होगा कि वे क्या लाने वाले हैं, और फिर हम अपनी बात रखेंगे।


परिसीमन और महिला आरक्षण विधेयक

परिसीमन और महिला आरक्षण विधेयक

महिला आरक्षण से संबंधित संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026, पिछले संसद सत्र में लोकसभा से पास नहीं हो पाया था। इस विधेयक के पक्ष में 298 वोट पड़े थे, जबकि 230 सांसदों ने इसके खिलाफ वोट दिया था। लोकसभा से पास होने के लिए इस विधेयक को दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता थी। विपक्ष का कहना है कि वह महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं है, लेकिन उसने परिसीमन की आलोचना की है। उनका तर्क है कि इससे संसद में दक्षिणी राज्यों का प्रतिनिधित्व कम हो सकता है। हालांकि, सरकार लगातार परिसीमन का बचाव कर रही है और आश्वासन दे रही है कि दक्षिणी राज्यों का प्रतिनिधित्व कम नहीं होगा। संसद का मॉनसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होगा और 13 अगस्त तक चलेगा।