संसद का विशेष सत्र: महिला आरक्षण और सीटों का विस्तार
महिला आरक्षण पर ऐतिहासिक कदम
आज से संसद का तीन दिवसीय विशेष सत्र आरंभ हो रहा है, जो भारतीय लोकतंत्र के लिए एक महत्वपूर्ण क्षण बन सकता है। इस सत्र का मुख्य विषय संविधान (131वां संशोधन) विधेयक है। यह विधेयक न केवल लोकसभा की सीटों के ढांचे में बदलाव लाएगा, बल्कि 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' (महिला आरक्षण) के लिए आने वाली प्रमुख कानूनी बाधाओं को भी समाप्त करेगा। इसका उद्देश्य लोकसभा की सीटों की संख्या को 543 से बढ़ाकर 850 करना है, ताकि 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' पर लागू कानूनी अड़चनों को दूर किया जा सके।
महिलाओं के लिए आरक्षण की योजना
सरकार का लक्ष्य 2029 के आम चुनावों में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करना है, बिना पुरुषों के लिए मौजूदा सीटों की संख्या को घटाए। यह कदम आंतरिक राजनीतिक संघर्ष को कम करने के लिए उठाया गया है। हालांकि, 850 सीटों के प्रस्तावित विस्तार के साथ, राज्यों के बीच सीटों का वितरण 2026 के परिसीमन में एक विवादास्पद मुद्दा बन सकता है।
850 सीटों का वितरण
विधेयक के मसौदे में विस्तारित सदन का स्पष्ट बंटवारा प्रस्तावित किया गया है, जिसमें 815 सीटें राज्यों के लिए और 35 सीटें केंद्र शासित प्रदेशों के लिए आरक्षित की गई हैं। यह मौजूदा 530 राज्य सीटों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 13 सीटों से एक महत्वपूर्ण वृद्धि है। सरकार ने परिसीमन को 2026 की जनगणना के बाद की प्रक्रिया से अलग करने का प्रस्ताव दिया है, और इसके बजाय 2011 की जनगणना के आंकड़ों को आधार बनाने का सुझाव दिया है।
आनुपातिक विस्तार मॉडल
केंद्र द्वारा समर्थित 'आनुपातिक विस्तार' मॉडल के अनुसार, हर राज्य की मौजूदा सीटों में लगभग 56 प्रतिशत की वृद्धि होने की उम्मीद है। इस वृद्धि का उद्देश्य राज्यों के बीच राजनीतिक संतुलन बनाए रखना और उत्तर-दक्षिण विभाजन की चिंताओं को कम करना है, जिसने ऐतिहासिक रूप से परिसीमन की प्रक्रियाओं में बाधा डाली है।
महिलाओं के लिए आरक्षण और परिसीमन का संबंध
'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' महिलाओं के लिए आरक्षण को परिसीमन और नवीनतम जनगणना से जोड़ता है। केंद्र अब परिसीमन और महिला विधायकों के लिए एक-तिहाई आरक्षण लागू करने की योजना बना रहा है, जिसमें 2011 की जनगणना के आंकड़ों का उपयोग किया जाएगा।
नए विधेयक का उद्देश्य 2029 के आम चुनावों से पहले सभी सीटों में से एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करना है। इसमें यह प्रस्ताव है कि परिसीमन का कार्य उपलब्ध सबसे नई जनगणना के आधार पर किया जाए।
850 सीटों के मॉडल का एक प्रमुख लाभ यह है कि इसमें महिलाओं के लिए लगभग 283 सीटें आरक्षित की जा सकती हैं, जबकि लगभग 567 सीटें सामान्य और अन्य श्रेणियों के लिए छोड़ी जा सकती हैं।
यह विधेयक हर परिसीमन के बाद आरक्षित सीटों को बारी-बारी से बदलने का प्रावधान भी करता है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि महिलाओं का प्रतिनिधित्व समय के साथ विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों में फैला रहे।
यह आरक्षण न केवल लोकसभा पर, बल्कि राज्यों की विधानसभाओं और दिल्ली, पुडुचेरी तथा जम्मू-कश्मीर की विधानसभाओं पर भी लागू होगा।
