संजय राउत का एकनाथ शिंदे पर तीखा हमला, भाजपा को मिली जीत पर उठाए सवाल

शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने बीएमसी चुनाव परिणामों के बाद उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर तीखा हमला बोला। उन्होंने शिंदे को 'जयचंद' करार देते हुए भाजपा की चुनावी रणनीति पर सवाल उठाए। राउत ने कहा कि अगर शिंदे ने पार्टी के साथ विश्वासघात नहीं किया होता, तो भाजपा को मुंबई में अपनी जगह नहीं मिलती। उन्होंने यह भी कहा कि मुंबई में मुकाबला बराबरी का है और शिवसेना (यूबीटी) सत्ताधारी गठबंधन पर कड़ी नजर रखेगी।
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संजय राउत का एकनाथ शिंदे पर तीखा हमला, भाजपा को मिली जीत पर उठाए सवाल

संजय राउत का बयान

शनिवार को शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) चुनाव परिणामों के बाद महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर कड़ा प्रहार किया। राउत ने कहा कि यदि शिंदे ने पार्टी के साथ विश्वासघात नहीं किया होता, तो भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को मुंबई के नगर निकाय में अपनी जगह बनाने का अवसर नहीं मिलता। उन्होंने यह भी कहा कि मराठी लोग शिंदे को 'जयचंद' के रूप में याद करेंगे।


जयचंद का संदर्भ

एक पोस्ट में, राउत ने ऐतिहासिक राजपूत शासक जयचंद का उल्लेख करते हुए शिंदे पर विश्वासघात का आरोप लगाया। जयचंद को लोककथाओं में पृथ्वीराज चौहान के खिलाफ मोहम्मद गोरी का साथ देने के लिए जाना जाता है। राउत ने कहा कि अगर शिंदे शिवसेना के जयचंद नहीं होते, तो भाजपा को मुंबई में कभी मेयर नहीं मिलता। उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाया कि वह राज्यों में अपनी सत्ता को मजबूत करने के लिए विपक्षी दलों में फूट डाल रही है।


भाजपा की चुनावी रणनीति

संजय राउत ने कहा कि भाजपा चुनाव जीतने के लिए 'जयचंद' का सहारा लेती है। उन्होंने उपमुख्यमंत्री की राजनीतिक स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनकी ताकत शून्य है। राउत ने कहा कि जब तक शिंदे सत्ता में हैं, लोग उन्हें सलाम करेंगे, लेकिन सत्ता खोने पर लोग उनकी गाड़ियों पर जूते फेंकेंगे। बीएमसी के चुनाव परिणामों पर टिप्पणी करते हुए राउत ने कहा कि मुख्यमंत्री के पास असीमित शक्तियां हैं, जिनमें पुलिस, धन और प्रशासनिक संसाधनों तक पहुंच शामिल है।


मुंबई में मुकाबला

राउत ने कहा कि मुंबई में भाजपा की जीत को लेकर हमें यह नहीं मान लेना चाहिए कि मुकाबला खत्म हो गया है। उन्होंने कहा कि एमएनएस को कम सीटें मिलीं, जबकि उन्हें लगभग 15 सीटें मिलनी चाहिए थीं। राउत ने यह भी कहा कि बीएमसी में विपक्ष की ताकत सत्ताधारी दल के बराबर है। उन्होंने जोर देकर कहा कि शिवसेना (यूबीटी) और उसके सहयोगी सत्ताधारी गठबंधन पर कड़ी नजर रखेंगे। राउत ने कहा कि बीएमसी में उनके पास 105 सदस्य हैं और वे मुंबई को नहीं बेचने देंगे।