श्रीगंगानगर बना देश का सबसे प्रदूषित शहर, वायु गुणवत्ता में गिरावट

राजस्थान का श्रीगंगानगर अब देश का सबसे प्रदूषित शहर बन गया है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 249 तक पहुंच गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि ओजोन का स्तर अत्यधिक बढ़ गया है, जिससे स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। इस स्थिति में सुधार के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है। जानें अन्य शहरों की स्थिति और प्रदूषण के कारणों के बारे में।
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श्रीगंगानगर बना देश का सबसे प्रदूषित शहर, वायु गुणवत्ता में गिरावट

श्रीगंगानगर में वायु प्रदूषण की गंभीर स्थिति

श्रीगंगानगर बना देश का सबसे प्रदूषित शहर, वायु गुणवत्ता में गिरावट

श्रीगंगानगर: राजस्थान में वायु प्रदूषण की स्थिति दिन-ब-दिन बिगड़ती जा रही है, और अब यह शहर देश का सबसे प्रदूषित स्थान बन गया है। 5 अप्रैल 2026 को यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 249 दर्ज किया गया, जो कि 'खराब' श्रेणी में आता है। इससे पहले, 4 अप्रैल को AQI 191 था, जिससे मात्र 24 घंटों में 58 अंकों की वृद्धि हुई है।

विशेषज्ञों के अनुसार, श्रीगंगानगर की हवा में ओजोन का स्तर अत्यधिक बढ़ गया है, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक है। वायु में मौजूद प्रदूषक तत्व सांस संबंधी बीमारियों, आंखों में जलन और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकते हैं। यह स्थिति इतनी गंभीर है कि यहां प्रदूषण का स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से लगभग 300 प्रतिशत अधिक हो गया है।

वहीं, पंपोर देश का सबसे स्वच्छ शहर बना हुआ है, जहां AQI केवल 16 दर्ज किया गया। इस तुलना से स्पष्ट है कि श्रीगंगानगर की हवा पंपोर की तुलना में लगभग 15 गुना अधिक प्रदूषित है।

राजस्थान के अन्य शहरों में, टोंक में एक दिन पहले AQI 268 था, जो अब घटकर 187 पर आ गया है। यानी यहां 24 घंटों में 81 अंकों का सुधार देखा गया है।

दिल्ली में भी प्रदूषण के स्तर में थोड़ी गिरावट आई है। यहां AQI 137 से घटकर 134 पर पहुंच गया है, जो 'मध्यम' श्रेणी में आता है। हालांकि यह सुधार मामूली है, लेकिन इसे लगातार प्रयासों का परिणाम माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि मौसम में बदलाव, औद्योगिक गतिविधियों और वाहनों से निकलने वाले धुएं के कारण प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ रहा है। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।

यह हालात स्पष्ट संकेत देते हैं कि पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण के लिए सरकार और आम जनता दोनों को मिलकर ठोस कदम उठाने होंगे, ताकि हवा की गुणवत्ता में सुधार लाया जा सके और लोगों के स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।