शी जिनपिंग का उत्तर कोरिया दौरा: चीन और उत्तर कोरिया के रिश्तों में नया मोड़

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग 8 और 9 जून को उत्तर कोरिया की यात्रा पर जा रहे हैं, जो उनके लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। इस दौरे का उद्देश्य चीन और उत्तर कोरिया के बीच संबंधों को मजबूत करना है। पिछले कुछ वर्षों में जिनपिंग ने विदेश यात्रा कम की है, लेकिन इस बार उनका प्योंगयांग जाना दर्शाता है कि चीन इस यात्रा को कितनी गंभीरता से ले रहा है। जानें इस दौरे का महत्व और क्षेत्रीय राजनीति पर इसके संभावित प्रभाव।
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शी जिनपिंग का उत्तर कोरिया दौरा: चीन और उत्तर कोरिया के रिश्तों में नया मोड़ gyanhigyan

शी जिनपिंग का उत्तर कोरिया दौरा

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग 8 और 9 जून को उत्तर कोरिया की यात्रा पर जा रहे हैं। इस दौरे और प्योंगयांग में किम जोंग उन के साथ उनकी मुलाकात पर वैश्विक ध्यान केंद्रित है। पिछले साल, दोनों नेताओं की मुलाकात बीजिंग में हुई थी, जब चीनी सेना ने एक भव्य परेड का आयोजन किया था। इस बार, जिनपिंग का उत्तर कोरिया जाना विशेष महत्व रखता है, क्योंकि उन्होंने हाल के वर्षों में अपने विदेशी दौरे कम कर दिए हैं। हाल ही में, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन जैसे प्रमुख नेता बीजिंग में उनसे मिले थे, लेकिन 2019 के बाद यह पहली बार है जब शी जिनपिंग खुद प्योंगयांग जा रहे हैं।


जिनपिंग के दौरे का महत्व

एक रिपोर्ट के अनुसार, क्राइसिस ग्रुप के सीनियर एनालिस्ट विलियम यांग का कहना है कि जिनपिंग अब कम विदेश यात्रा करते हैं। वर्तमान में, यह एक प्रवृत्ति बन गई है कि विश्व के प्रमुख नेता बीजिंग में उनसे मिलने आते हैं। जिनपिंग का उत्तर कोरिया जाना इस बात का संकेत है कि चीन इस यात्रा को कितनी गंभीरता से ले रहा है। आंकड़ों के अनुसार, 2013 से 2019 के बीच, जिनपिंग हर साल औसतन 14 विदेशी दौरे करते थे, लेकिन 2022 से 2025 के बीच यह संख्या घटकर केवल छह रह गई है।


चीन और उत्तर कोरिया के संबंध

पारंपरिक दृष्टिकोण से, चीन और उत्तर कोरिया के संबंधों में हमेशा चीन का वर्चस्व रहा है। अमेरिका की एक संस्था 'नेशनल कमिटी ऑन नॉर्थ कोरिया' के 2022 के आंकड़ों के अनुसार, उत्तर कोरिया अपने व्यापार के लिए 95 प्रतिशत तक चीन पर निर्भर था। लेकिन 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद, इस क्षेत्र के समीकरण तेजी से बदल रहे हैं।


उत्तर कोरिया और रूस के बीच बढ़ती नजदीकी

यूक्रेन युद्ध के दौरान, उत्तर कोरिया ने रूस की खुलकर सहायता की है। उसने रूस को बड़े पैमाने पर खतरनाक हथियार, तोपें और सैनिक उपलब्ध कराए हैं, जिससे रूस को युद्ध में मदद मिली है। 2023 के बाद से, मॉस्को ने उत्तर कोरिया को लगभग 14.4 अरब डॉलर का भुगतान किया है, जिसके बदले में उसने सैनिकों की तैनाती, तोपखाने और बैलिस्टिक मिसाइलें खरीदी हैं। इस कारण, क्षेत्र की राजनीति में नए बदलाव देखने को मिल रहे हैं।