शिवसेना की 60वीं वर्षगांठ: संजय राउत ने पार्टी के सफर पर की चर्चा

शिवसेना (UBT) के नेता संजय राउत ने पार्टी की 60वीं वर्षगांठ पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि शिवसेना ने कई चुनौतियों का सामना करते हुए एक शानदार सफर तय किया है। उन्होंने उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में पार्टी की उपलब्धियों का जिक्र किया और बताया कि कैसे शिवसेना ने एक क्षेत्रीय आंदोलन से राष्ट्रीय स्तर की राजनीतिक ताकत बनने का सफर तय किया। राउत ने बालासाहेब ठाकरे के समय के उतार-चढ़ावों का भी उल्लेख किया और छत्रपति शिवाजी महाराज के संघर्ष का उदाहरण दिया।
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शिवसेना का हीरक महोत्सव

शिवसेना (UBT) के नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने शुक्रवार को पार्टी की 60वीं वर्षगांठ के अवसर पर कहा कि कई चुनौतियों और राजनीतिक उतार-चढ़ावों का सामना करने के बावजूद शिवसेना ने एक शानदार यात्रा पूरी की है। उन्होंने यह बात शिवसेना की डायमंड जुबली समारोह में कही। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में राउत ने उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना को "असली शिवसेना" करार दिया और इसके सफर को एक क्षेत्रीय आंदोलन से राष्ट्रीय स्तर की राजनीतिक ताकत बनने तक के रूप में याद किया।


पार्टी की स्थापना और सफर

राउत ने कहा कि आज शिवसेना की 60वीं वर्षगांठ है, जो असली शिवसेना की डायमंड जुबली है। उन्होंने बताया कि शिवसेना ने 60 साल का लंबा सफर तय किया है, जो पहले बालासाहेब ठाकरे और फिर उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में हुआ। पार्टी की स्थापना का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यह संगठन 60 साल पहले मराठी लोगों के अधिकारों के लिए बनाया गया था। उस समय कई लोग मजाक में कहते थे कि यह संगठन छह महीने भी नहीं टिकेगा और भविष्यवाणी की गई थी कि शिवसेना कभी मुंबई और ठाणे से बाहर नहीं निकल पाएगी।


उतार-चढ़ाव का सामना

राउत ने कहा कि सभी पूर्वानुमान गलत साबित हुए। शिवसेना ने मुंबई, ठाणे और महाराष्ट्र में जीत हासिल की और अंततः दिल्ली तक पहुँची। उन्होंने कहा कि हर राजनीतिक संगठन को उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ता है। कभी बहाव तेज होता है, कभी यह रुक जाता है, और कभी स्थिर हो जाता है। 'हिंदू हृदय सम्राट' बालासाहेब ठाकरे के समय में भी कई उतार-चढ़ाव आए। उन्होंने कहा कि बालासाहेब को भी कई बार धोखे का सामना करना पड़ा।


छत्रपति शिवाजी महाराज का उदाहरण

राउत ने छत्रपति शिवाजी महाराज के हिंदवी स्वराज्य की स्थापना के संघर्ष का उदाहरण देते हुए कहा कि आंतरिक विरोध हमेशा बड़ी चुनौतियाँ पेश करता है। इसलिए, आज जो कुछ हो रहा है, उससे हमें कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए। शिवसेना प्रमुख हमेशा हमें यह उदाहरण देते थे कि छत्रपति शिवाजी महाराज ने अपने ही लोगों से सबसे बड़ी बाधाओं का सामना किया था।


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