शिवसेना का आरोप: नीट प्रश्नपत्र लीक पर सरकार की कार्रवाई अधूरी

शिवसेना ने नीट प्रश्नपत्र लीक के मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को अपर्याप्त बताया है। पार्टी ने आरोप लगाया है कि प्रधानमंत्री मोदी की सरकार देश को नुकसान पहुंचा रही है और प्रस्तावित लोक परीक्षा संशोधन विधेयक को एक छलावा करार दिया। संपादकीय में कहा गया है कि यह विधेयक छात्रों को धोखा देने का एक तरीका है। कॉजपा के आंदोलन के बाद प्रधान ने इस्तीफा दिया, जिसने लाखों लोगों को एकजुट किया। शिवसेना ने गृह मंत्री अमित शाह पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं।
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शिवसेना का बयान

मुंबई, 27 जुलाई: शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने सोमवार को कहा कि राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) प्रश्नपत्र लीक का मामला केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से समाप्त नहीं होगा। पार्टी ने यह भी आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार देश को नुकसान पहुंचा रही है। शिवसेना ने अपने मुखपत्र 'सामना' में एक तीखा संपादकीय प्रकाशित करते हुए सरकार के प्रस्तावित लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 को एक छलावा बताया।


विधेयक पर आपत्ति

पार्टी का कहना है कि यह नया कानून पहले जैसा ही है, केवल जुर्माने और सजा के आंकड़ों में बदलाव किया गया है। संपादकीय में यह भी कहा गया कि 'अहंकारी' सरकार ने विरोधियों पर लाठीचार्ज किया, लेकिन देश के युवा जंतर-मंतर पर डटे रहे।


संपादकीय में यह भी उल्लेख किया गया है, 'धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा इस मामले को समाप्त नहीं करेगा। प्रधानमंत्री मोदी और उनके प्रशासन का कार्य देश के लिए हानिकारक रहा है। गृह मंत्री अमित शाह पर भी जनता का गुस्सा फूटेगा।'


कॉजपा का आंदोलन

संपादकीय में यह भी कहा गया कि 'लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026' में प्रश्नपत्र लीक के मामलों में 10 साल तक की सजा और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है, जो वास्तव में पुराने कानून के समान है।


पार्टी ने यह विधेयक छात्रों और उनके माता-पिता को धोखा देने का एक तरीका बताया। दिल्ली में 'कॉकरोच जनता पार्टी' (कॉजपा) के आंदोलन के बाद शनिवार को प्रधान ने इस्तीफा दिया, जिसने लाखों लोगों को एकजुट किया।


सरकार की प्रतिक्रिया

सरकार ने कॉजपा की कुछ मांगों को मान लिया, जिसमें आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को 'सम्मानजनक' मुआवजा देना और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकियों को वापस लेना शामिल था। विपक्षी पार्टी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और शाह अब मजाक का पात्र बन गए हैं, क्योंकि युवाओं ने सरकार की आलोचना के लिए रचनात्मक नारे और मीम का सहारा लिया।


शिवसेना ने कहा कि कॉजपा के आंदोलन के दौरान युवाओं की रचनात्मकता और डिजिटल तकनीक को नया जीवन मिला। पार्टी ने यह भी कहा कि 20 छात्रों की आत्महत्याओं ने आक्रोश को भड़काया और देश को एकजुट किया।


गृह मंत्री की जिम्मेदारी

पार्टी ने आरोप लगाया कि गृह मंत्री शाह ने छात्रों पर लाठीचार्ज का आदेश दिया और जरूरत पड़ने पर गोली चलाने के भी निर्देश दिए। शिवसेना ने कहा कि गृह मंत्री जवाबदेही से नहीं बच सकते और प्रधानमंत्री मोदी को अंततः अपने 'अमानवीय' कृत्यों के लिए देश से माफी मांगनी होगी।