शिवपुरी में वीबीजी रामजी बिल के प्रावधानों का खुलासा
केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने शिवपुरी में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान वीबीजी रामजी बिल के महत्वपूर्ण प्रावधानों का खुलासा किया। इस विधेयक के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के दिनों की संख्या में 25% की वृद्धि की गई है, जिससे श्रमिकों को अधिक अवसर मिलेंगे। इसके अलावा, डिजिटलीकरण के माध्यम से भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने और भुगतान की समयसीमा को सख्ती से लागू करने की बात भी की गई। जानें इस बिल के अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं के बारे में।
| Jan 11, 2026, 18:47 IST
वीबीजी रामजी बिल का महत्व
केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने आज शिवपुरी में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान संसद द्वारा पारित ‘वीबीजी रामजी बिल’ के मुख्य प्रावधानों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह विधेयक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 21वीं सदी के आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण का एक महत्वपूर्ण परिणाम है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था में पारदर्शिता, दक्षता और स्थिरता लाएगा।
रोजगार में 25% वृद्धि और लचीलापन
केंद्रीय मंत्री सिंधिया ने बताया कि नए प्रावधानों के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के दिनों की संख्या में 25 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। अब 100 दिनों के बजाय 125 दिनों का रोजगार सुनिश्चित किया जाएगा। इसके अलावा, राज्य सरकारों को यह लचीलापन दिया गया है कि वे बुवाई जैसे मौसमों में जब कार्य की आवश्यकता कम होती है, रोजगार को समायोजित कर, आवश्यकता के समय अधिक अवसर उपलब्ध करा सकें, ताकि श्रमिकों को समय पर काम मिल सके।
डिजिटलीकरण से भ्रष्टाचार पर नियंत्रण
केंद्रीय मंत्री ने पूर्ववर्ती वर्षों में सामने आए घोटालों का उल्लेख करते हुए कहा कि पहले मैनुअल श्रम के नाम पर मशीनों के उपयोग जैसी अनियमितताओं से भ्रष्टाचार बढ़ता था। अब पूरी प्रक्रिया को डिजिटलीकरण और डिजिटल ऑडिट से जोड़ा गया है। प्रत्येक कार्य का निरीक्षण डिजिटल माध्यम से होगा, जिससे भ्रष्टाचार की कोई गुंजाइश नहीं बचेगी और मैनुअल हस्तक्षेप पूरी तरह समाप्त होगा।
भुगतान की समयसीमा और जवाबदेही
सिंधिया ने बताया कि श्रमिकों के हितों को प्राथमिकता देते हुए बिल में भुगतान की समय-सीमा को सख्ती से लागू किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि 15 दिनों के भीतर भुगतान अनिवार्य होगा। किसी भी प्रकार की देरी की स्थिति में संबंधित जिम्मेदार अधिकारी के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
