शिमला में दो बुजुर्ग महिलाओं ने तलाक के लिए याचिका दायर की

शिमला जिले के ठियोग उपमंडल में दो 75 वर्षीय महिलाओं ने अपने से कम उम्र के पतियों से अलग रहने का निर्णय लिया है। इन मामलों में पति-पत्नी ने संयुक्त याचिकाएं दायर की थीं, जिन्हें अदालत ने स्वीकार कर लिया। एक याचिका में 1990 में विवाह करने वाले दंपति के बीच मतभेदों का जिक्र है, जबकि दूसरी याचिका में 2008 में विवाह करने वाले दंपति के तीन बच्चों का भी उल्लेख है। जानें इस अद्वितीय मामले के बारे में और अदालत के निर्णय के पीछे की कहानी।
 | 
शिमला में दो बुजुर्ग महिलाओं ने तलाक के लिए याचिका दायर की

शिमला में तलाक की अनोखी घटनाएं

शिमला में दो बुजुर्ग महिलाओं ने तलाक के लिए याचिका दायर की

शिमला जिले के ठियोग उपमंडल में 75 वर्षीय दो महिलाओं ने अपने से कम उम्र के पतियों से अलग रहने का निर्णय लिया है। इन मामलों में पति-पत्नी ने शिमला के परिवार न्यायालय में संयुक्त याचिकाएं दायर की थीं। अदालत ने इन याचिकाओं को स्वीकार करते हुए 39 और 59 वर्ष के पतियों को तलाक देने की अनुमति दी है।

पहली याचिका 75 वर्षीय पत्नी और 59 वर्षीय पति द्वारा दायर की गई थी। इसमें बताया गया कि उनका विवाह 1990 में हुआ था, लेकिन उनके बीच कोई संतान नहीं हुई। 2010 से दोनों के बीच गंभीर मतभेद उत्पन्न हो गए थे। कई सम्मानित व्यक्तियों ने इस विवाद को सुलझाने का प्रयास किया, लेकिन सफल नहीं हो सके।

दोनों ने सहमति जताई कि उनका विवाह समाप्त किया जाना चाहिए, इसी कारण उन्होंने याचिका दायर की। दूसरी याचिका 75 वर्षीय पत्नी और 39 वर्षीय पति ने दायर की थी, जिसमें बताया गया कि उनका विवाह 2008 में हुआ था और उनके तीन बच्चे हैं। जून 2021 से उत्पन्न मतभेदों के कारण वे अलग रह रहे हैं। इस विवाद का समाधान नहीं हो सका। न्यायालय में दोनों ने स्पष्ट किया कि वे अब वैवाहिक संबंध जारी नहीं रखना चाहते।

जांच-पड़ताल के बाद न्यायालय ने यह निष्कर्ष निकाला कि दोनों पक्षों के बीच मेल-मिलाप संभव नहीं है। गुजारा भत्ते का कोई प्रश्न नहीं उठता। सहमति बनी है कि तीनों बच्चे पिता के साथ रहेंगे और पति बच्चों को मां से मिलने की अनुमति देगा।

तलाकशुदा पत्नी के लिए पति एक कमरा, रसोई और स्नानघर उपलब्ध करवाएगा। याचिका के समर्थन में दोनों पक्षों ने शपथ पत्र प्रस्तुत किए, जिसमें 59 वर्षीय पति और 75 वर्षीय पत्नी ने स्पष्ट किया कि वे अब वैवाहिक संबंध जारी रखने के इच्छुक नहीं हैं। पति अपनी पेंशन से तलाकशुदा पत्नी को प्रति माह पांच हजार रुपये भरण-पोषण के रूप में देगा और जब भी वह बीमार होगी, उसके उपचार का खर्च भी वहन करेगा।