शहीद मेजर ऋषिकेश रामाणी के बलिदान दिवस पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन
हाल ही में, शहीद मेजर ऋषिकेश रामाणी के 17वें बलिदान दिवस पर एक श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में उनके माता-पिता, गणमान्य व्यक्तियों और नागरिकों ने भाग लिया। मगनभाई पटेल ने मेजर की बहादुरी और बलिदान के बारे में बताया। कार्यक्रम में रक्तदान शिविर का आयोजन भी किया गया, जिसमें 129 यूनिट रक्त एकत्र किया गया। इस दिन रात्रि में 'वीरांजलि संगीत कार्यक्रम' का भी आयोजन किया गया।
| Jun 25, 2026, 18:59 IST
शहीद मेजर ऋषिकेश रामाणी का बलिदान दिवस
हाल ही में, शहीद मेजर ऋषिकेश रामाणी के 17वें बलिदान दिवस पर एक श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम हर साल की तरह इस वर्ष भी गार्ड ऑफ ऑनर के माध्यम से आयोजित हुआ। कार्यक्रम का संचालन अहमदाबाद के निकोल क्षेत्र में मेजर ऋषिकेश रामाणी गार्डन में शाम सेवा फाउंडेशन के अध्यक्ष मगनभाई पटेल की अध्यक्षता में हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत मेजर ऋषिकेश रामाणी के माता-पिता, श्री वल्लभभाई और श्रीमती गीताबेन रामाणी द्वारा उनके स्मारक पर गार्ड ऑफ ऑनर के साथ श्रद्धांजलि अर्पित करने से हुई। इसके बाद, मुख्य अतिथि मगनभाई पटेल ने सेना के दो उच्च अधिकारियों के साथ मिलकर स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित किया और मेजर ऋषिकेश रामाणी ट्रस्ट को आर्थिक सहायता का चेक भारत विकास परिषद, महावीरनगर शाखा को सौंपा।
विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति
इस कार्यक्रम में अनंता और स्टार हॉस्पिटल के डॉ. भावेश ठक्कर तथा 11 मराठा रेजिमेंट के लेफ्टिनेंट चेतन वत्स अपनी 18 जवानों की टीम के साथ उपस्थित रहे। उन्होंने भी मेजर ऋषिकेश रामाणी को गार्ड ऑफ ऑनर के ब्यूगल के साथ श्रद्धांजलि अर्पित की और विजिटर बुक में अपना संदेश अंकित किया। इसके साथ ही, उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों ने उन्हें स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया।
कार्यक्रम का आयोजन
यह कार्यक्रम भारत विकास परिषद की चार शाखाओं के संयुक्त सहयोग से आयोजित किया गया था।
मगनभाई पटेल का वक्तव्य
कार्यक्रम में उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों और नागरिकों को संबोधित करते हुए, मगनभाई पटेल ने वीर ऋषिकेश रामाणी की बहादुरी और बलिदान के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि बचपन से ही देशभक्ति के जज्बे से भरे मेजर ऋषिकेश ने 11 जून, 2005 को भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट के रूप में शामिल होकर मातृभूमि की रक्षा की। उनकी पहली नियुक्ति पंजाब के भटिंडा में हुई थी।
मेजर ऋषिकेश का अदम्य साहस
मेजर ऋषिकेश ने जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों के खिलाफ सर्च ऑपरेशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने विकट परिस्थितियों में तीन आतंकवादियों को मार गिराया और मातृभूमि की रक्षा करते हुए अपने प्राणों की आहुति दी।
शिक्षा और सैन्य प्रशिक्षण
मगनभाई पटेल ने मेजर ऋषिकेश की शिक्षा के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि उन्होंने अहमदाबाद के एक निजी स्कूल से प्राथमिक शिक्षा प्राप्त की और बाद में सैनिक स्कूल से माध्यमिक शिक्षा पूरी की। इसके बाद, उन्होंने नेशनल डिफेंस एकेडमी और इंडियन मिलिट्री एकेडमी में प्रशिक्षण लिया।
भारत का रक्षा क्षेत्र
मगनभाई पटेल ने भारत के डिफेंस सेक्टर के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत की सुरक्षा का मुख्य आधार सीमा सुरक्षा और आंतरिक सुरक्षा है। भारतीय सेना, वायुसेना और नौसेना की संयुक्त ताकत देश की सुरक्षा का एक मजबूत कवच है।
शहीदों के परिवारों के लिए सुझाव
मगनभाई पटेल ने शहीदों के परिवारों के लिए सरकार और समाज की जिम्मेदारी पर जोर दिया। उन्होंने सुझाव दिया कि हर राज्य में सेना के उच्च अधिकारियों की स्मृति में प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए जाने चाहिए।
रक्तदान शिविर का आयोजन
कार्यक्रम में एक रक्तदान शिविर का भी आयोजन किया गया, जिसमें 129 ब्लड यूनिट एकत्र किए गए।
समापन समारोह
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी लोगों ने 'जब तक सूरज चांद रहेगा, ऋषिकेश तेरा नाम रहेगा' के नारों के साथ जयघोष किया। इस दिन रात्रि में 'वीरांजलि संगीत कार्यक्रम' का आयोजन भी किया गया।
