शशि थरूर ने केरल चुनावों में यूडीएफ की संभावनाओं पर जताया विश्वास
केरल विधानसभा चुनावों में भाजपा की स्थिति
कांग्रेस के नेता और सांसद शशि थरूर ने केरल विधानसभा चुनावों में यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) की संभावनाओं पर भरोसा जताते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को राज्य में शून्य सीटों वाली पार्टी करार दिया। चुनावों से पहले थरूर ने कहा कि यह ध्यान में रखना चाहिए कि केरल में भाजपा के पास कोई सीट नहीं है। असली मुकाबला यूडीएफ और एलडीएफ के बीच है। हमारे पास अनुभवी और नए उम्मीदवार हैं। लोग एलडीएफ के खराब शासन से परेशान हैं और भाजपा इसका समाधान नहीं है क्योंकि उनकी कोई क्षमता नहीं है। वास्तव में, विधानसभा में उनकी एक भी सीट नहीं है और यदि उन्हें एक, दो या तीन सीटें भी मिलती हैं, तो वे इसे बड़ी जीत के रूप में पेश करेंगे।
नए और सकारात्मक नेतृत्व की आवश्यकता
थरूर ने आगे कहा कि लोग एक सकारात्मक, नई और ताजगी भरी सरकार की तलाश में हैं, जो केरल के विकास का सपना देखती है। उनका संदेश स्पष्ट है कि कांग्रेस पार्टी केरल में 85 से 100 सीटें जीतने की उम्मीद कर रही है। 'बी टीम' विवाद पर उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह से बेतुका है। हमें किसी की बी टीम से कोई लेना-देना नहीं है क्योंकि हम केरल की ए टीम हैं। भाजपा और एलडीएफ दोनों नहीं चाहते कि कांग्रेस राज्य में सत्ता में आए। हमारा समझौता केरल की जनता के साथ है, और हम यह सुनिश्चित करेंगे कि उनके हित सुरक्षित रहें।
महिलाओं के प्रतिनिधित्व पर जोर
राजनीति में महिलाओं के प्रतिनिधित्व के मुद्दे पर थरूर ने महिला आरक्षण विधेयक का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि चुनावों में किसी भी पार्टी ने महिलाओं को पर्याप्त सीटें नहीं दी हैं। कांग्रेस के पास केवल 10% सीटें हैं, जबकि भाजपा के पास 11% हैं। हमें महिलाओं की अधिक संख्या की आवश्यकता नहीं है, इसलिए आरक्षण विधेयक की जरूरत है ताकि महिलाओं को सुनिश्चित अवसर मिल सकें। भाजपा समर्थक बयानों के आरोपों का जवाब देते हुए थरूर ने कहा कि वह भाजपा और विशेष रूप से सांप्रदायिकता के खिलाफ हैं, और वह राष्ट्रीय हित की बात करते हैं।
केंद्र और प्रधानमंत्री की आलोचना
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी द्वारा केंद्र और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना पर चिंता व्यक्त करते हुए थरूर ने कहा कि यह हमारे लिए बेहद शर्मनाक है। ईरान युद्ध पर सरकार के संयम और चुप्पी का समर्थन करते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि सरकार इसका उपयोग शांति स्थापित करने के लिए करेगी। लेकिन विडंबना यह है कि यह भूमिका पाकिस्तान निभा रहा है। तुर्की और मिस्र भी इस दिशा में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं, इसलिए वह इससे खुश नहीं हो सकते।
