शशि थरूर का विवादास्पद बयान: नेहरू की प्रशंसा पर विवेक का महत्व
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने हाल ही में एक बयान में नेहरू के प्रति अपनी प्रशंसा और आलोचना के बीच संतुलन बनाने की बात की। उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाया कि वह नेहरू को एक सुविधाजनक बलि का बकरा बना रही है। थरूर का यह कहना कि वे नेहरू के अंधभक्त नहीं हैं, भारतीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण संदेश है। इस बयान ने राजनीतिक हलचल को जन्म दिया है, जिससे कांग्रेस और भाजपा के बीच बहस तेज हो गई है। जानें इस बयान का व्यापक प्रभाव क्या हो सकता है।
| Jan 9, 2026, 12:22 IST
शशि थरूर का बयान और राजनीतिक हलचल
कांग्रेस के सांसद शशि थरूर ने हाल ही में एक बयान देकर राजनीतिक माहौल में हलचल पैदा कर दी है। उन्होंने कहा कि वह देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के प्रशंसक हैं, लेकिन उनके हर विचार का समर्थन करना उचित नहीं मानते। केरल में एक कार्यक्रम के दौरान, थरूर ने सत्तारूढ़ भाजपा की रणनीतियों पर भी तीखा हमला किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह नेहरू के योगदान को महत्व देते हैं, लेकिन अंधभक्ति नहीं करते।
थरूर ने कहा कि नेहरू ने स्वतंत्र भारत की लोकतांत्रिक नींव रखी और देश को वैश्विक पहचान दिलाई। फिर भी, उनके कुछ निर्णयों पर सवाल उठाना स्वाभाविक है। उन्होंने स्वीकार किया कि 1962 के चीन युद्ध से संबंधित कुछ फैसलों की जिम्मेदारी नेहरू पर है, लेकिन यह कहना कि आज की हर समस्या की जड़ नेहरू हैं, यह ऐतिहासिक अन्याय है।
भाजपा पर आरोप और राजनीतिक बहस
थरूर ने भारतीय जनता पार्टी पर आरोप लगाया कि वह नेहरू को एक सुविधाजनक बलि का बकरा बना रही है। भाजपा हर विफलता और असहज सवाल से बचने के लिए बार-बार नेहरू का नाम लेती है। उन्होंने कहा कि यह रवैया न तो राष्ट्र निर्माण में सहायक है और न ही जनता को सच्चाई से अवगत कराता है। इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई है। कांग्रेस इसे संतुलित और बौद्धिक वक्तव्य मानती है, जबकि भाजपा समर्थक इसे नेहरू विरोधी बयान करार दे रहे हैं।
थरूर ने न तो नेहरू की खुलकर प्रशंसा की और न ही उन्हें खलनायक बनाया। उन्होंने कहा कि इतिहास को समझना चाहिए, न कि उसका उपयोग करना चाहिए। थरूर ने सही कहा कि नेहरू आलोचना से परे नहीं हैं, लेकिन यह देखना जरूरी है कि आलोचना ईमानदार है या राजनीतिक। अगर आलोचना का उद्देश्य सीखना है, तो हमें इतिहास से सबक लेकर आज की नीतियों को बेहतर बनाना चाहिए। थरूर का यह कहना कि वह नेहरू के अंधभक्त नहीं हैं, वास्तव में भारतीय राजनीति के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश है।
