शनि देव के प्रभाव से बचने के उपाय और लक्षण
शनि देव का प्रभाव और उसके लक्षण
ज्योतिष शास्त्र में शनि देव को एक क्रोधित देवता माना जाता है, और इन्हें सबसे कठोर ग्रहों में से एक माना जाता है। जब शनि का बुरा प्रभाव किसी व्यक्ति पर पड़ता है, तो उसके जीवन में कई समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। शनि की स्थिति जन्म कुंडली में यह दर्शाती है कि व्यक्ति के जीवन पर इसका प्रभाव शुभ है या अशुभ।
यदि किसी की कुंडली में शनि की स्थिति सही नहीं है, तो यह शनि दोष का कारण बनता है, जिससे व्यक्ति को जीवन में कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इस लेख में, हम शनि की बुरी नजर से बचने के उपायों और उसके प्रभाव के लक्षणों के बारे में चर्चा करेंगे।
शनि के अशुभ प्रभाव के लक्षण
- यदि किसी की कुंडली में शनि की स्थिति ठीक नहीं है, तो दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। विशेषकर जब शनि के साथ राहु और मंगल भी हों, तो वाहन चलाते समय सावधानी बरतनी चाहिए। यात्रा के दौरान भी सतर्क रहना आवश्यक है।
- शनि के दुष्प्रभाव से पिता-पुत्र के संबंधों में खटास आ सकती है। यदि कुंडली में शनि का सूर्य के साथ संबंध है, तो यह मतभेदों का कारण बन सकता है।
- ज्योतिष के अनुसार, शनि का बुरा प्रभाव कार्यक्षेत्र में सफलता में बाधा डालता है और व्यक्ति के जीवन में नकारात्मकता लाता है।
शनि दोष से बचने के उपाय
- यदि आपकी कुंडली में शनि दोष है, तो शनिवार का उपवास करें।
- शनिवार को शनि देव की पूजा करते समय शनि के बीज मंत्र “ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः” का 108 बार जाप करें। इससे कुंडली में शनि की स्थिति में सुधार होगा।
- शनिवार को किसी गरीब को अनाज का दान करें और काले या नीले रंग के वस्त्र पहनें। इससे शनि का प्रभाव शुभ होता है।
- शनिवार की शाम को पीपल के पेड़ में जल अर्पित करें और सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
शनि देव को सभी देवताओं में सबसे क्रोधित माना जाता है। यदि आप शनि की बुरी दृष्टि से बचना चाहते हैं, तो उपरोक्त उपायों का पालन करें। इससे आपकी कुंडली में शनि की स्थिति में सुधार होगा और जीवन की परेशानियों का समाधान होगा।
