वैश्विक महंगाई के बीच भारत की आर्थिक मजबूती
महंगाई का वैश्विक संकट
जब भी कोई बड़ा संकट वैश्विक स्तर पर उत्पन्न होता है, इसका सीधा प्रभाव आम लोगों की आर्थिक स्थिति पर पड़ता है। मध्य पूर्व में चल रहे तनाव और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में बाधाओं के कारण, आज पूरी दुनिया महंगाई की गंभीर समस्या का सामना कर रही है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को कमजोर कर दिया है.
भारत की स्थिति
दुनिया के 24 प्रमुख देशों के आंकड़ों के अनुसार, वहां ईंधन की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। लेकिन जब हम भारत की ओर देखते हैं, तो गर्व का अनुभव होता है। जबकि अन्य शक्तिशाली देश अपने नागरिकों को महंगाई से बचाने में असफल रहे हैं, भारत ने अपनी प्रभावशाली कूटनीति और मजबूत आर्थिक नीतियों के माध्यम से अपने नागरिकों को इस वैश्विक संकट से काफी हद तक सुरक्षित रखा है.
पड़ोसी देशों की आर्थिक स्थिति
भारत एक ऐसे क्षेत्र में स्थित है जहां लगभग सभी पड़ोसी देश गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमतें 54.9% और डीजल की 44.9% बढ़ चुकी हैं। श्रीलंका में पेट्रोल 38.2% और डीजल 41.8% महंगा हो गया है। नेपाल में भी पेट्रोल की कीमतें 38.2% और डीजल की 58.5% बढ़ी हैं। यहां तक कि चीन में भी पेट्रोल की कीमतों में 21.7% और डीजल में 23.7% की वृद्धि हुई है।
महाशक्तियों की स्थिति
ईंधन की महंगाई ने सभी देशों को प्रभावित किया है। म्यांमार में पेट्रोल की कीमतों में 89.7% और डीजल में 112.7% की वृद्धि हुई है। अमेरिका में पेट्रोल 44.5% और डीजल 48.1% महंगा हो गया है। संयुक्त अरब अमीरात में पेट्रोल 52.4% और डीजल 86.1% बढ़ा है।
पश्चिमी देशों की चुनौतियाँ
यूरोप के कई देश, जो अपनी मजबूत अर्थव्यवस्था पर गर्व करते थे, आज तेल संकट के आगे झुक चुके हैं। यूनाइटेड किंगडम में पेट्रोल 19.2% और डीजल 34.2% महंगा हो गया है। फ्रांस में पेट्रोल 20.9% और डीजल 31.0% की वृद्धि हुई है।
भारत की उपलब्धियाँ
इन 24 देशों के आंकड़ों को देखते हुए, भारत की स्थिति किसी चमत्कार से कम नहीं है। जब अन्य देशों में पेट्रोल और डीजल की कीमतें 50 से 100% तक बढ़ गई हैं, वहीं भारत में पेट्रोल की कीमत में केवल 3.2% और डीजल में 3.4% की मामूली वृद्धि हुई है। यह भारत सरकार की दूरदर्शिता और रणनीतियों का परिणाम है।
