वृषभ संक्रांति: इस दिन क्या करें और क्या न करें
वृषभ संक्रांति का महत्व
आज 15 मई को वृषभ संक्रांति का पर्व मनाया जा रहा है। इस दिन सूर्य देव मेष राशि से निकलकर वृषभ राशि में प्रवेश करते हैं, जिसे वृषभ संक्रांति कहा जाता है। धर्म ग्रंथों में संक्रांति का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि इस समय किए गए पुण्य कार्यों से व्यक्ति को सुख और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है।
वृषभ संक्रांति पर ध्यान देने योग्य बातें
इस दिन सूर्य की उपासना, पवित्र स्नान, दान और शुभ कार्यों के लिए अत्यधिक फलदायी माना जाता है। ज्योतिष के अनुसार, वृषभ राशि के स्वामी शुक्र ग्रह हैं, जो भौतिक सुख और ऐश्वर्य के प्रतीक हैं। इस दिन किए गए शुभ कार्य विशेष फलदायी होते हैं।
हालांकि, कुछ कार्य ऐसे हैं जिन्हें इस दिन नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे शुभ फल में कमी आ सकती है।
क्या न करें?
झूठ बोलने और तामसिक भोजन से बचें: वृषभ संक्रांति के दिन झूठ बोलना, तामसिक भोजन करना, अनावश्यक विवाद करना और देर तक सोना जैसी गलतियों से बचना चाहिए।
देर तक सोने से बचें: इस दिन सूर्योदय से पहले उठने का प्रयास करें।
दान करना न भूलें: इस दिन दान का विशेष महत्व है, इसलिए जरूरतमंदों को दान देना न भूलें।
शुभ फल प्राप्त करने के उपाय
गंगा में स्नान करें: वृषभ संक्रांति पर पवित्र नदियों में स्नान करना चाहिए। यदि संभव न हो, तो घर पर गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
सूर्य देव को अर्घ्य दें: सुबह जल्दी उठकर स्नान के बाद सूर्य देव को तांबे के लोटे से अर्घ्य दें और 'ॐ घृणि सूर्याय नमः' का जाप करें।
अन्न और वस्त्र का दान करें: अपनी सामर्थ्यानुसार अन्न और वस्त्र का दान करें।
प्याऊ लगवाएं: प्यासों को पानी पिलाना या प्याऊ लगवाना भी फलदायी माना जाता है।
