वृषभ संक्रांति 2026: पूजा विधि और महत्व

वृषभ संक्रांति 2026 का महत्व और पूजा विधि जानें। इस दिन सूर्य मेष राशि को छोड़कर वृषभ राशि में प्रवेश करेंगे। जानें शुभ मुहूर्त, दान का महत्व और किन चीजों से बचना चाहिए। यह त्योहार विभिन्न राज्यों में अलग-अलग नामों से मनाया जाता है।
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वृषभ संक्रांति 2026: पूजा विधि और महत्व gyanhigyan

वृषभ संक्रांति का महत्व

भारतीय संस्कृति में संक्रांति का एक विशेष स्थान है। यह वह दिन है जब सूर्य एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करता है। वृषभ संक्रांति, जो 15 मई 2026 को शुक्रवार को मनाई जाएगी, में सूर्य मेष राशि को छोड़कर वृषभ राशि में प्रवेश करेंगे।


वृषभ का अर्थ और विभिन्न नाम

संस्कृत में वृषभ का अर्थ बैल है, जो भगवान शिव का वाहन माना जाता है। इस दिन को विभिन्न राज्यों में अलग-अलग नामों से जाना जाता है, जैसे तमिलनाडु में वैगासी मासम, बंगाल में ज्येष्ठो माश और उड़ीसा में बुशा संक्रांति।


शुभ मुहूर्त

  • वृषभ संक्रांति का आरंभ सुबह 6:28 बजे होगा।
  • इस दिन का पुण्य काल सुबह 5:30 से 6:28 बजे तक रहेगा।


सूर्य देव को अर्ध्य देने की विधि

सूर्य देव को जल अर्पित करने के लिए तांबे के लोटे का उपयोग करें। इसमें जल, लाल फूल, अक्षत, रोली और थोड़े से काले तिल मिलाकर अर्पित करें। साथ ही, "ॐ घृणि सूर्याय नमः" का जाप करें।


गंगा स्नान का महत्व

संक्रांति के दिन गंगा में स्नान करना अत्यंत पवित्र माना जाता है। यदि यह संभव न हो, तो घर पर गंगा जल मिलाकर स्नान करें। गंगाजल से स्नान करने से जीवन में दरिद्रता और नकारात्मकता का नाश होता है।


दान का महत्व

इस दिन जल से भरा मटका या घड़ा दान करना अत्यंत शुभ होता है। आप प्याऊ भी स्थापित कर सकते हैं। इसके अलावा, सत्तू, जौ, छाता, सफेद वस्त्र, गुड़, तांबा, मौसमी फल और गाय को हरा चारा खिलाना भी लाभकारी होता है।


वृषभ संक्रांति पर किन चीजों से बचें

इस दिन जल्दी उठें और देर तक सोने से बचें। मन और शरीर को शुद्ध रखें। झूठ बोलने से बचें और बिना कारण विवाद में न पड़ें। तामसिक भोजन जैसे मांस और मछली का सेवन न करें।