विश्व वायु गुणवत्ता रिपोर्ट 2025: पाकिस्तान सबसे प्रदूषित, भारत छठे स्थान पर

विश्व वायु गुणवत्ता रिपोर्ट 2025 ने पाकिस्तान को सबसे प्रदूषित देश के रूप में पहचाना है, जबकि भारत छठे स्थान पर है। रिपोर्ट में प्रदूषण के स्तर, प्रभावित शहरों और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों पर चर्चा की गई है। जानें कि किन देशों ने विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानकों को पूरा किया और किस प्रकार जलवायु परिवर्तन ने वायु गुणवत्ता को प्रभावित किया है।
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विश्व वायु गुणवत्ता रिपोर्ट 2025: पाकिस्तान सबसे प्रदूषित, भारत छठे स्थान पर

वायु प्रदूषण की स्थिति

पाकिस्तान को दुनिया का सबसे प्रदूषित देश माना गया है, जबकि भारत छठे स्थान पर है। यह जानकारी विश्व वायु गुणवत्ता रिपोर्ट 2025 में सामने आई है। स्विट्जरलैंड की वायु गुणवत्ता प्रौद्योगिकी कंपनी 'आईक्यूएयर' द्वारा जारी की गई इस रिपोर्ट में 143 देशों और क्षेत्रों के 9,446 शहरों में स्थित निगरानी स्टेशनों से प्राप्त आंकड़ों का विश्लेषण किया गया है।


रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान के बाद बांग्लादेश, ताजिकिस्तान, चाड और कांगो का स्थान है।


भारत के प्रदूषित शहर

भारत में प्रदूषण की स्थिति की बात करें तो उत्तर प्रदेश का लोनी विश्व का सबसे अधिक प्रदूषित शहर है। इसके बाद दिल्ली चौथे स्थान पर है। विश्व के दस सबसे प्रदूषित शहरों में से पांच भारत में हैं, जिनमें लोनी, बिर्नीहाट, दिल्ली, गाजियाबाद और उला शामिल हैं।


पिछले वर्ष की तुलना

इस वर्ष की रिपोर्ट में पिछले वर्ष की तुलना में 54 देशों में पीएम2.5 के वार्षिक औसत में वृद्धि देखी गई है, जबकि 75 देशों में गिरावट आई है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि केवल 14 प्रतिशत शहर ही विश्व स्वास्थ्य संगठन के वार्षिक पीएम2.5 दिशानिर्देशों को पूरा कर पाए हैं, जो पिछले वर्ष के 17 प्रतिशत से कम है।


केवल 13 देश/क्षेत्र डब्ल्यूएचओ के औसत पीएम2.5 दिशानिर्देशों पर खरे उतरे हैं, जिनमें फ्रेंच पोलिनेशिया, प्यूर्तो रिको, यूएस वर्जिन आइलैंड्स, बारबाडोस, न्यू कैलेडोनिया, आइसलैंड, बरमूडा, रीयूनियन, अंडोरा, ऑस्ट्रेलिया, ग्रेनाडा, पनामा और एस्तोनिया शामिल हैं।


जलवायु परिवर्तन का प्रभाव

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ी हुई जंगल की आग ने 2025 में वैश्विक वायु गुणवत्ता में गिरावट लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यूरोप और कनाडा से रिकॉर्ड बायोमास उत्सर्जन ने लगभग 1,380 मेगाटन कार्बन का योगदान दिया।


रिपोर्ट के आठ साल के इतिहास में दूसरी बार कनाडा उत्तरी अमेरिका का सबसे प्रदूषित देश बना है, क्योंकि वहां की जंगल की आग ने अमेरिका और यूरोप के कुछ हिस्सों में हवा की गुणवत्ता को प्रभावित किया।


यूरोप में प्रदूषण की स्थिति

यूरोप में, 23 देशों में वार्षिक औसत पीएम2.5 सांद्रता में वृद्धि देखी गई, जबकि 18 देशों में गिरावट आई और एक नए देश को इसमें जोड़ा गया।