विश्व पुस्तक मेले में ‘मंत्र-विप्लव’ पुस्तक का उद्घाटन
विश्व पुस्तक मेले में ‘मंत्र-विप्लव’ पुस्तक का उद्घाटन किया गया, जिसमें ज्ञान और भक्ति के महत्व पर चर्चा की गई। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह श्री दत्तात्रेय होसबाले जी ने इस अवसर पर महर्षि अरविन्दो के विचारों का उल्लेख किया और समाज में विद्यमान चुनौतियों पर प्रकाश डाला। पुस्तक के लेखक तरुण विजय ने भी इसके विषय वस्तु पर चर्चा की। इस लेख में ज्ञान की परंपरा और उसके महत्व को समझाया गया है।
| Jan 15, 2026, 21:36 IST
पुस्तक का विमोचन समारोह
नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह श्री दत्तात्रेय होसबाले जी ने 15 जनवरी 2026 को भारतमंडपम में आयोजित विश्व पुस्तक मेले में ‘मंत्र – विप्लव’ नामक पुस्तक का उद्घाटन किया। इस पुस्तक को तरुण विजय ने लिखा है और इसे प्रभात प्रकाशन ने प्रकाशित किया है। विमोचन समारोह में राज्यसभा सांसद डॉ. सुधांशु त्रिवेदी, लेखक तरुण विजय और प्रभात प्रकाशन के चेयरमैन प्रभात कुमार भी मौजूद थे।
ज्ञान की परंपरा पर विचार
इस अवसर पर बोलते हुए श्री दत्तात्रेय होसबाले जी ने कहा कि भारत की संस्कृति ज्ञान की धरोहर है, जिससे यश और वैभव की प्राप्ति होती है। उन्होंने बताया कि हमारे पूर्वजों को इस विषय में स्पष्टता थी।
ज्ञान और भक्ति का महत्व
उन्होंने यह भी कहा कि ज्ञान व्यक्ति को सही मार्ग पर ले जाता है, लेकिन भक्ति के बिना ज्ञान से अहंकार उत्पन्न हो सकता है।
महर्षि अरविन्दो के विचार
सरकार्यवाह जी ने महर्षि अरविन्दो के तीन कार्यों का उल्लेख किया, जो स्वतंत्र भारत में करने की आवश्यकता है: प्राचीन ज्ञान को एकत्र करना, उसे आधुनिक जीवन के अनुरूप बनाना, और नए ज्ञान का सृजन करना।
भारतीय ज्ञान परंपरा का अध्ययन
उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा के शब्दों पर और अधिक अध्ययन की आवश्यकता है।
सत्य और इतिहास का विकृत होना
गलत विमर्श के निर्माण के प्रयासों पर उन्होंने कहा कि सत्य और इतिहास को विकृत करने का प्रयास अज्ञान के कारण नहीं, बल्कि एक एजेंडे के तहत किया जा रहा है।
बुद्धि का नाश और समाज पर प्रभाव
सरकार्यवाह जी ने बताया कि सम्मोह से बुद्धि का नाश होता है, और बुद्धि के नाश से समाज का सर्वनाश होता है।
राज्यसभा सांसद का दृष्टिकोण
इस अवसर पर भाजपा के राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि हमारे समाज के बौद्धिक प्रतिष्ठान का एक हिस्सा एम फैक्टर (मैकाले, मुगल एवं मार्क्स) से प्रभावित हो गया है। उन्होंने बताया कि समाज के सामने दो प्रकार की चुनौतियाँ हैं: एक जो स्पष्ट हैं और दूसरी जो अदृश्य हैं। ‘मंत्र – विप्लव’ इन अदृश्य चुनौतियों को उजागर करता है और उनसे निपटने का मार्ग दिखाता है।
पुस्तक की विषय वस्तु
लेखक तरुण विजय ने ‘मंत्र – विप्लव’ पुस्तक की विषय वस्तु पर प्रकाश डाला। महात्मा विदुर के एक कथन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यदि विचार ही भ्रष्ट हो जाएं, तो इससे राजा, प्रजा और राष्ट्र का नाश हो सकता है। इस पुस्तक में उसी स्थिति का प्रतिकार करने का प्रयास किया गया है।
