लोकसभा में पेपर लीक रोकने के लिए संशोधन बिल पर गरमागरम बहस

लोकसभा में पेपर लीक रोकने के लिए संशोधन बिल पर चर्चा जारी है, जिसमें केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने बहस की शुरुआत की। इस विधेयक में कड़ी सज़ा का प्रावधान है। विपक्षी सदस्यों ने प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के मुद्दे पर हंगामा किया। कांग्रेस और भाजपा के नेताओं ने एक-दूसरे पर आरोप लगाए, जबकि सपा और तृणमूल कांग्रेस के नेताओं ने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए। जानें इस महत्वपूर्ण चर्चा के सभी पहलुओं के बारे में।
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लोकसभा में चर्चा का आरंभ

लोकसभा में पेपर लीक रोकने के लिए संशोधन बिल पर चर्चा चल रही है, जिसमें केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने बहस की शुरुआत की। यह कदम केंद्र सरकार द्वारा सोमवार को निचले सदन में पेपर लीक विरोधी कानून में संशोधन के लिए पेश किए गए बिल के बाद उठाया गया है। इस विधेयक में 10 साल तक की जेल और 50 लाख रुपये तक के जुर्माने जैसी कड़ी सज़ा का प्रावधान है। वहीं, नीट प्रश्नपत्र लीक के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के मुद्दे पर गृह मंत्री अमित शाह के बयान की मांग कर रहे विपक्षी सदस्यों के हंगामे के कारण राज्यसभा की बैठक मंगलवार को एक बार के स्थगन के बाद दोपहर दो बजे पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी गई।


लोकसभा में नेताओं की प्रतिक्रियाएँ

कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने लोकसभा में परीक्षा प्रश्नपत्र निरोधक कानून को मोदी सरकार की विफलता का प्रतीक बताया और कहा कि गृह मंत्री अमित शाह को सदन में यह स्पष्ट करना चाहिए कि प्रदर्शनकारी छात्रों पर पैलेट गन के इस्तेमाल का आदेश किसने दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि 2024 में पेपर लीक के मामले में तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इससे इनकार किया था और उनका रवैया अब भी वैसा ही है। गोगोई ने संसद परिसर में भाजपा के कुछ सदस्यों द्वारा प्रधान का स्वागत किए जाने का उल्लेख करते हुए कहा कि इस सरकार को शर्म आनी चाहिए कि पूर्व मंत्री का ऐसा स्वागत किया गया मानो वह पाकिस्तान से युद्ध करके लौटे हों।


भाजपा और सपा के नेताओं की टिप्पणियाँ

भाजपा की सांसद बांसुरी स्वराज ने लोकसभा में कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों पर तीखा हमला करते हुए कहा कि वे यह दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि प्रश्नपत्र लीक की समस्या 2014 के बाद शुरू हुई। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने पेपर लीक को 'घोर अपराध' कहा है, इसलिए यह संशोधन लाया गया है। समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर भाजपा पर तंज कसते हुए कहा कि उन्होंने प्रधान का त्यागपत्र लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बचा लिया।


अन्य नेताओं की चिंताएँ

तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी ने केंद्र सरकार पर परीक्षाओं और छात्रों को सुरक्षा प्रदान करने में विफल रहने का आरोप लगाया। द्रमुक सांसद दयानिधि मारन ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) को अनावश्यक बताते हुए कहा कि इस परीक्षा पर रोक लगनी चाहिए। प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि इस सरकार ने रोजगार पैदा करने वाले सभी क्षेत्रों को कमजोर किया है और पिछले दशक में 152 बार पेपर लीक हुए हैं, लेकिन किसी भी दोषी को सज़ा नहीं दी गई है।