लोकसभा ने पेमेंट सिस्टम में संशोधन को दी मंजूरी, UPI पर चार्ज लगाने का मिलेगा अधिकार
लोकसभा ने 'पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007' में संशोधन को मंजूरी दी है, जिससे केंद्र सरकार को बैंकों और पेमेंट सेवा प्रदाताओं को UPI लेनदेन पर शुल्क लगाने का अधिकार मिलेगा। यह संशोधन कानूनी बाधाओं को समाप्त करता है और भविष्य में डिजिटल भुगतान विधियों पर चार्ज लगाने की संभावनाओं को खोलता है। जानें इस महत्वपूर्ण बिल के बारे में और इसके संभावित प्रभावों के बारे में।
| Aug 6, 2026, 17:20 IST
लोकसभा में महत्वपूर्ण संशोधन पारित
गुरुवार को लोकसभा ने 'पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007' में एक महत्वपूर्ण संशोधन को मंजूरी दी। इस संशोधन के तहत, केंद्र सरकार को बैंकों और पेमेंट सेवा प्रदाताओं को यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) लेनदेन और अन्य डिजिटल भुगतान विधियों पर शुल्क लगाने की अनुमति मिल गई है। हालांकि, इस संशोधन के तुरंत प्रभाव से कोई शुल्क लागू नहीं होगा, लेकिन यह कानूनी बाधा को समाप्त करता है जो बैंकों को ऐसे लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) वसूलने से रोकती थी।
टैक्सेशन बिल का पारित होना
लोकसभा ने 'टैक्सेशन एंड अदर लॉज़ (अमेंडमेंट) बिल, 2026' को ध्वनि मत से पारित किया। सदन की कार्यवाही पहले स्थगित होने के बाद दोपहर 2 बजे फिर से शुरू हुई, लेकिन हंगामे के बीच बिना किसी चर्चा के इस बिल को मंजूरी दी गई। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस बिल को पेश किया, जिसका उद्देश्य 'पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007', 'इनकम टैक्स एक्ट, 2025' और 'फाइनेंस एक्ट, 2026' में संशोधन करना है।
संशोधन का विवरण
यह संशोधन 'पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट' की धारा 10A के मौजूदा प्रावधान को बदलता है। बिल में कहा गया है: "'पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007' की धारा 10A में, 'इनकम-टैक्स एक्ट, 1961 की धारा 269SU के तहत बताए गए इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट के तरीके' शब्दों, अंकों और अक्षरों की जगह, 'इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट का एक या ज़्यादा तरीका, जिसे केंद्र सरकार नोटिफिकेशन के ज़रिए बताए' शब्द जोड़े जाएंगे। यह बदलाव आधिकारिक गजट में इस एक्ट के प्रकाशित होने की तारीख से लागू होगा।" सरल शब्दों में, यह संशोधन केंद्र सरकार को यह तय करने का कानूनी अधिकार देता है कि भविष्य में किन इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट तरीकों पर शुल्क लगाया जा सकता है।
भविष्य की संभावनाएँ
इस बिल के पारित होने से UPI लेनदेन पर अपने-आप शुल्क नहीं लगेंगे। बल्कि, यह सरकार को अधिकार देता है कि वह भविष्य में अलग नोटिफिकेशन के माध्यम से बैंकों और पेमेंट सेवा प्रदाताओं को शुल्क लगाने की अनुमति दे सके। जब तक ऐसा कोई नोटिफिकेशन जारी नहीं किया जाता, UPI लेनदेन मौजूदा प्रणाली के तहत ही चलते रहेंगे।
कानूनी प्रावधानों का प्रभाव
पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट की धारा 10A अभी बैंकों और पेमेंट सिस्टम प्रदाताओं को इनकम टैक्स एक्ट की धारा 269SU के तहत आने वाले इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट तरीकों पर कोई भी डायरेक्ट या इनडायरेक्ट चार्ज लगाने से रोकती है। धारा 269SU के तहत, 50 करोड़ रुपये से अधिक सालाना टर्नओवर वाले व्यवसायों के लिए आवश्यक है कि वे ग्राहकों को विशेष डिजिटल पेमेंट विकल्प प्रदान करें, जिनमें BHIM-UPI QR कोड और RuPay डेबिट कार्ड शामिल हैं। इस कानूनी प्रावधान के कारण, बैंक और पेमेंट सेवा प्रदाताओं ने अब तक नोटिफाइड इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट तरीकों पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) नहीं लगाया है। इस संशोधन से यह कानूनी रोक हट जाएगी, जिससे सरकार को भविष्य की नीति बनाने में अधिक लचीलापन मिलेगा।
