लेडी मेहरबाई टाटा: टाटा स्टील को संकट से उबारने वाली महिला
टाटा समूह और लेडी मेहरबाई का योगदान
टाटा समूह, जो मुंबई में स्थित एक प्रमुख निजी व्यवसायिक समूह है, में टिस्को कंपनी भी शामिल है। एक समय ऐसा आया जब टाटा स्टील की आर्थिक स्थिति बेहद खराब हो गई थी। इस कठिन समय में एक महिला ने कंपनी को संकट से बाहर निकाला। आइए जानते हैं कि वह महिला कौन थी और उसने टाटा स्टील को कैसे बचाया।
लेडी मेहरबाई टाटा का परिचय
यह कहानी लेडी मेहरबाई टाटा की है, जिनके योगदान के कारण टाटा स्टील को आज की पहचान मिली है। उन्हें भारतीय नारीवादी प्रतीकों में से एक माना जाता है। लेडी मेहरबाई ने बाल विवाह उन्मूलन, महिला मताधिकार, और लड़कियों की शिक्षा के लिए महत्वपूर्ण कार्य किए।
कैसे बचाई गई टाटा स्टील
हरीश भट्ट अपनी पुस्तक 'टाटा स्टोरीज' में बताते हैं कि कैसे लेडी मेहरबाई ने टाटा स्टील को बचाने के लिए अपने व्यक्तिगत संपत्ति को गिरवी रख दिया। जब कंपनी को कैश की कमी का सामना करना पड़ा, तो उन्होंने जुबली हीरा और अपनी अन्य संपत्तियों को इम्पीरियल बैंक में गिरवी रखकर फंड जुटाया।
लेडी मेहरबाई का सामाजिक कार्य
लेडी मेहरबाई टाटा ने 1929 में शारदा अधिनियम के लिए परामर्श दिया और महिलाओं के लिए समान राजनीतिक स्थिति की मांग की। वह भारतीय महिला लीग संघ की अध्यक्ष और बॉम्बे प्रेसीडेंसी महिला परिषद की संस्थापक थीं।
खेल और साहसिकता में मेहरबाई
मेहरबाई टाटा ओलंपिक में टेनिस खेलने वाली पहली भारतीय महिला थीं और उन्होंने साठ से अधिक पुरस्कार जीते। वह 1912 में जेपेलिन एयरशिप पर सवार होने वाली पहली भारतीय महिला भी थीं।
