लीबिया के रेगिस्तान में युवक की अद्भुत बचाव कहानी
लीबिया के खतरनाक रेगिस्तान में जिंदा लौटने की कहानी
एक अद्भुत घटना ने साबित किया है कि 'जाको राखे साइयां, मार सके न कोय'। यह मामला लीबिया के खतरनाक रेगिस्तान से जुड़ा है, जहां एक युवक ने पांच दिनों तक जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष किया। जब सभी ने उसकी उम्मीद छोड़ दी थी, तब रेस्क्यू टीम ने उसे सुरक्षित रूप से खोज निकाला। यह कहानी लीबिया के ब्रेगा के निवासी मरवान अल-बहीजी की है। मरवान 12 मई को एक तेल क्षेत्र से निकले थे, लेकिन रास्ते में वह भटक गए और दुर्गम रेगिस्तान में पहुंच गए।
जैसे ही वह रेगिस्तान के अंदर पहुंचे, उनकी गाड़ी खराब हो गई। दूर-दूर तक केवल रेत का समंदर था और मोबाइल नेटवर्क भी नहीं था, जिससे वह वहीं फंस गए। जब वह कई दिनों तक घर नहीं लौटे, तो उनके लापता होने की सूचना से हड़कंप मच गया। उनके लिए एक बड़े पैमाने पर खोज अभियान शुरू किया गया, जिसमें स्थानीय प्रशासन और सैकड़ों लोगों के साथ-साथ 4×4 गाड़ियां और हेलिकॉप्टर भी शामिल थे। सोशल मीडिया पर भी उनकी तस्वीरें साझा की गईं।
17 मई को, रेस्क्यू टीम को जिखरा के दक्षिण-पूर्व में 'रामल 81' क्षेत्र में मरवान की लोकेशन मिली। जब रेस्क्यू टीम वहां पहुंची, तो मरवान अपनी खराब गाड़ी के पास थके हुए बैठे थे, लेकिन उनकी आंखों में राहत थी। रेस्क्यू टीम की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। एक बचावकर्मी ने खुशी में गोलियां चलाईं, जबकि दूसरे ने गाड़ी का हॉर्न बजाया। हैरानी की बात यह है कि पांच दिनों तक बिना किसी मदद के रहने के बावजूद मरवान का स्वास्थ्य ठीक था।
कैसे बची जान?
सर्वाइवल विशेषज्ञों का मानना है कि मरवान की जान बचाने का मुख्य कारण यह था कि उन्होंने अपनी गाड़ी को नहीं छोड़ा। विशेषज्ञों के अनुसार, जब कोई रेगिस्तान या जंगल में फंसता है, तो उसे अपनी गाड़ी के पास ही रुकना चाहिए। ऐसा करने से रेस्क्यू टीम के लिए उसे ढूंढना आसान हो जाता है। लीबिया का यह रेगिस्तान लगभग 5,02,000 वर्ग मील में फैला है और इसे सहारा रेगिस्तान का सबसे सूखा और कम जनसंख्या वाला हिस्सा माना जाता है।
