लावण्या नारायण का दोहरा मापदंड: खेल में धर्म पर विवाद

लावण्या नारायण, जो 'The Hindu' की पत्रकार हैं, ने IPL फाइनल में भगवान शिव के भजन पर प्रतिक्रिया दी, जिससे सोशल मीडिया पर विवाद खड़ा हो गया। उनके दोहरे मापदंड को लेकर लोगों ने उनकी आलोचना की है, खासकर जब उन्होंने मुस्लिम खिलाड़ियों के प्रति अपने प्रेम का प्रदर्शन किया। यह मामला भारतीय मीडिया में धर्म और खेल के बीच की जटिलताओं को उजागर करता है। क्या लावण्या का यह रवैया केवल एक व्यक्तिगत विचार है या यह एक बड़े सामाजिक मुद्दे का हिस्सा है? जानें इस लेख में।
 | 
लावण्या नारायण का दोहरा मापदंड: खेल में धर्म पर विवाद gyanhigyan

भारतीय मीडिया में पाखंड का उदाहरण

लावण्या नारायण का दोहरा मापदंड: खेल में धर्म पर विवाद


भारतीय मीडिया में खुद को निष्पक्ष और सेक्युलर बताने वाले पत्रकारों का पाखंड अक्सर उजागर होता है। 'The Hindu' और 'स्पोर्ट्सस्टारवेब' की डिप्टी टीम लीड लावण्या नारायण ने खेल में धर्म को लेकर ऐसा दोहरा मापदंड दिखाया है कि सोशल मीडिया पर उन्हें आलोचना का सामना करना पड़ रहा है।


IPL फाइनल में धर्म का मुद्दा

31 मई 2026 को हुए IPL फाइनल में मशहूर गायक कैलाश खेर ने भगवान शिव का भजन गाया, जिससे पूरा स्टेडियम भक्ति के माहौल में झूम उठा। लेकिन लावण्या नारायण को यह दृश्य असहनीय लगा। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि खेलों में धर्म को नहीं लाना चाहिए। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा भड़क गया।


मुस्लिम खिलाड़ियों के प्रति लावण्या का प्रेम

जब सोशल मीडिया यूजर्स ने लावण्या के पुराने ट्वीट्स को खंगाला, तो उनके दोगलेपन का पर्दाफाश हुआ। एक ट्वीट में उन्होंने तुर्की की फुटबॉल टीम का वीडियो शेयर करते हुए 'माशाल्लाह' लिखा था, जबकि उस समय मुस्लिम खिलाड़ी मैदान पर रोजा खोल रहे थे।


पाकिस्तानी क्रिकेटरों के प्रति लावण्या का झुकाव

लावण्या का पाकिस्तानी क्रिकेटरों के प्रति प्रेम भी उनके ट्वीट्स में स्पष्ट है। वे पाकिस्तानी खिलाड़ियों को ईद की शुभकामनाएं देती हैं और उनके साथ जश्न मनाती हैं।


सोशल मीडिया पर लावण्या की आलोचना

लावण्या नारायण के इस पाखंड के उजागर होने के बाद सोशल मीडिया पर उन्हें 'दक्षिण दिल्ली की फर्जी बुद्धिजीवी' कहा जा रहा है। लोग यह भी कह रहे हैं कि वे हिंदू नाम रखकर भारत में काम करती हैं, लेकिन उनकी नफरत केवल सनातन धर्म के प्रति है।


सेक्युलरिज्म का असली चेहरा

लावण्या का यह रवैया केवल एक उदाहरण नहीं है, बल्कि यह एक विशेष वर्ग की पुरानी समस्या है। जब भी हिंदू प्रतीकों की बात आती है, तब ही खेल में धर्म को दूर रखने की बात की जाती है। लेकिन जब मुस्लिम खिलाड़ी मैदान में नमाज पढ़ते हैं, तो इसे खूबसूरती माना जाता है।