लालू प्रसाद यादव का 78वां जन्मदिन: राजनीति में उनकी यात्रा

लालू प्रसाद यादव, जो आज 78 वर्ष के हो गए हैं, ने भारतीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण स्थान बनाया है। उनके जीवन की शुरुआत साधारण थी, लेकिन उन्होंने संघर्षों के बावजूद एक प्रभावशाली नेता के रूप में पहचान बनाई। इस लेख में, हम उनके जन्मदिन के अवसर पर उनके जीवन की कुछ महत्वपूर्ण घटनाओं और उपलब्धियों पर चर्चा करेंगे। जानें कैसे उन्होंने राजनीति में कदम रखा, मुख्यमंत्री बने और रेल मंत्रालय में अपनी प्रबंधन क्षमताओं का लोहा मनवाया।
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लालू प्रसाद यादव का 78वां जन्मदिन: राजनीति में उनकी यात्रा gyanhigyan

लालू प्रसाद यादव का जन्मदिन

आरजेडी के नेता लालू प्रसाद यादव आज, 11 जून को अपने 78वें जन्मदिन का जश्न मना रहे हैं। चाहे सत्ता हो या विपक्ष, लालू यादव ने दशकों तक राजनीति में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके बिना राज्य या केंद्र की राजनीति में किसी भी गठबंधन का निर्माण करना कठिन होता है। हालांकि, बहुत कम लोग जानते हैं कि इस राजनीतिक दिग्गज की शुरुआत कितनी साधारण थी। शायद उन्होंने खुद भी नहीं सोचा था कि वे एक दिन देश की राजनीति में इतनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। आइए, उनके जन्मदिन के अवसर पर उनके जीवन से जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें जानते हैं...


जन्म और पारिवारिक पृष्ठभूमि

लालू प्रसाद यादव का जन्म 11 जून 1948 को बिहार के गोपालगंज जिले के फुलवरिया गांव में हुआ। उनका प्रारंभिक जीवन संघर्षों से भरा था। उनकी ख्वाहिश केवल एक सरकारी नौकरी पाने की थी। छात्र राजनीति में सक्रिय होने के बावजूद, उन्हें लगता था कि राजनीति में उनका भविष्य नहीं है। उनके राजनीतिक सफर की शुरुआत से पहले ही उनका ध्यान कहीं और था। लालू यादव पुलिस में कांस्टेबल बनना चाहते थे, ताकि उनका जीवन ठीक से चल सके।


राजनीति में प्रवेश

लालू यादव ने पटना विश्वविद्यालय के छात्र संघ के महासचिव के रूप में अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की। इसके बाद, 1973 में वे पटना विश्वविद्यालय के अध्यक्ष बने। इस दौरान, जयप्रकाश नारायण ने आपातकाल के खिलाफ आंदोलन शुरू किया। जेपी आंदोलन में भाग लेने के कारण, लालू यादव को जेल भेजा गया, और यहीं से उनकी राजनीतिक पहचान बनी। 1977 में, उन्होंने जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा और 29 वर्ष की आयु में सांसद बने।


आडवाणी की गिरफ्तारी

1990 में, अयोध्या राम मंदिर का मुद्दा गरमाया हुआ था। उस समय बीजेपी के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी ने रथयात्रा निकाली। जब आडवाणी बिहार पहुंचे, तब लालू यादव ने उनकी रथयात्रा को रोकने का निर्णय लिया।


अक्टूबर में, समस्तीपुर में आडवाणी को गिरफ्तार कर लिया गया, जिससे देश की राजनीति में हलचल मच गई। बीजेपी ने केंद्र की वीपी सरकार से समर्थन वापस ले लिया, जिसके परिणामस्वरूप सरकार गिर गई। इस घटना के बाद, लालू यादव एक प्रभावशाली नेता के रूप में उभरे।


मुख्यमंत्री बनने का सफर

मार्च 1990 में, लालू यादव बिहार के मुख्यमंत्री बने। इस दौरान, उन्होंने तीन महत्वपूर्ण निर्णय लिए। उन्होंने ताड़ी की बिक्री पर कर और उपकर को समाप्त किया, लगभग 150 चरवाहा विद्यालय खोले, और खेतिहर मजदूरों का न्यूनतम वेतन 16.50 से बढ़ाकर 21.50 रुपए किया।


हालांकि, उन पर चारा घोटाले का आरोप लगा और उन्हें 25 जुलाई 1997 को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा। यह उनके लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ था। इसके बाद, राबड़ी देवी बिहार की अगली मुख्यमंत्री बनीं। 5 जुलाई 1997 को, लालू यादव ने राष्ट्रीय जनता दल की स्थापना की।


रेल मंत्री के रूप में उपलब्धियां

जब लालू यादव ने रेल मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाली, तो उनके प्रबंधन की प्रशंसा देश-विदेश में हुई। उनके कौशल की सराहना की गई, और लोग उनकी प्रबंधन क्षमताओं के कायल हो गए। यही कारण है कि 2004 में, उन्होंने आईआईएम अहमदाबाद में छात्रों को प्रबंधन की शिक्षा दी।