लश्कर के उप प्रमुख ने पाकिस्तान के नेताओं को दी खुली धमकी
पाकिस्तान में लश्कर-ए-तैयबा के उप प्रमुख सैफुल्लाह कसूरी ने अपने नेताओं को इजरायल को मान्यता देने पर गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी है। उन्होंने एक रैली में कहा कि यदि किसी ने भी इजरायल को स्वीकार करने का विचार किया, तो उसे समाप्त कर दिया जाएगा। यह बयान उस समय आया है जब अमेरिका के राष्ट्रपति ने पाकिस्तान समेत कई मुस्लिम देशों से इजरायल के साथ संबंध सामान्य करने की अपील की है। कसूरी ने पाकिस्तान की विदेश नीति में बदलाव के खिलाफ कट्टरपंथी रुख अपनाया है, जिससे देश की स्थिति और भी जटिल हो गई है।
| May 28, 2026, 13:52 IST
पाकिस्तान में लश्कर की धमकी
पाकिस्तान में लश्कर-ए-तैयबा के उप प्रमुख सैफुल्लाह कसूरी ने अपने नेताओं शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर को खुली धमकी दी है। उन्होंने इजरायल को मान्यता देने की किसी भी कोशिश पर गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी है। एक सार्वजनिक रैली में, कसूरी ने कहा कि यदि किसी ने इजरायल को स्वीकार करने का विचार किया, तो उसे समाप्त कर दिया जाएगा। यह बयान उस समय आया है जब अमेरिका के राष्ट्रपति ने पाकिस्तान समेत कई मुस्लिम देशों से इजरायल के साथ संबंध सामान्य करने की अपील की है।
ईद उल अजहा की नमाज के बाद आयोजित रैली में, कसूरी ने पाकिस्तान की विदेश नीति में किसी भी बदलाव के खिलाफ कट्टरपंथी रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि कोई भी वैश्विक शक्ति इस्लामी देशों को इजरायल को मान्यता देने के लिए मजबूर नहीं कर सकती। कसूरी ने पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच मजबूत होते रक्षा संबंधों का उल्लेख करते हुए दावा किया कि पाकिस्तान की सैन्य क्षमता अब इजरायली प्रभाव का मुकाबला करने में सक्षम है। अपने भाषण में, उन्होंने जिहाद, शहादत और फिलिस्तीन संघर्ष जैसे संवेदनशील मुद्दों का उपयोग कर समर्थकों को भड़काने की कोशिश की।
हालांकि, सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि कसूरी की यह बयानबाजी एक सुनियोजित रणनीति का हिस्सा हो सकती है। कुछ विश्लेषकों के अनुसार, पाकिस्तान के फील्ड मार्शल आसिम मुनीर अमेरिका के दबाव से बचने के लिए इस तरह की कट्टर प्रतिक्रिया को सामने आने दे रहे हैं ताकि यह संदेश दिया जा सके कि पाकिस्तान में इजरायल के साथ संबंध सामान्य करने का जबरदस्त विरोध है।
यह विवाद तब और गहरा हुआ जब अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान युद्ध को समाप्त करने के लिए संभावित समझौते के तहत पाकिस्तान, सऊदी अरब, कतर और अन्य मुस्लिम देशों से अब्राहम समझौते में शामिल होने की अपील की। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने क्षेत्र में जटिल हालात को संभालने के लिए काफी प्रयास किए हैं और अब यह आवश्यक है कि संबंधित देश कम से कम अब्राहम समझौते पर हस्ताक्षर करें।
अब्राहम समझौता अमेरिका की मध्यस्थता में 2020 में शुरू हुआ था, जिसके तहत इजरायल और कई अरब देशों के बीच संबंध सामान्य किए गए। ट्रंप चाहते हैं कि पाकिस्तान और अन्य मुस्लिम देश भी इसी दिशा में आगे बढ़ें।
इस स्थिति में, पाकिस्तान एक कठिन स्थिति में फंसता दिखाई दे रहा है। एक ओर, वह अमेरिका के साथ करीबी संबंधों का लाभ उठा रहा है, वहीं दूसरी ओर, घरेलू राजनीति और धार्मिक संगठनों के कारण इजरायल को मान्यता देना उसके लिए एक संवेदनशील मुद्दा है। पाकिस्तान फिलहाल ईरान संघर्ष में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है, और अमेरिका ने इसकी सराहना की है।
विश्लेषकों का कहना है कि अब्राहम समझौते में शामिल होने से पाकिस्तान को कुछ कूटनीतिक और आर्थिक लाभ मिल सकते हैं, लेकिन इसके गंभीर जोखिम भी हैं। ऐसा कदम पाकिस्तान की फिलिस्तीन समर्थक छवि को नुकसान पहुंचा सकता है, ईरान के साथ तनाव बढ़ा सकता है और देश के भीतर अस्थिरता पैदा कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान का अंतिम फैसला काफी हद तक सऊदी अरब के रुख पर निर्भर करेगा।
