लद्दाख में भारत ने खोला जियोथर्मल कुआं, बिजली उत्पादन की नई दिशा

भारत ने लद्दाख में 1000 मीटर गहरा जियोथर्मल कुआं खोला है, जो बिजली उत्पादन की नई संभावनाओं को जन्म दे रहा है। इस क्षेत्र में, जहां पहले घास भी नहीं उगती थी, अब 800 किमी में घास उगाई जा रही है। ओएनजीसी द्वारा सफलतापूर्वक खोदे गए इस कुएं से उबलता पानी और भाप निकाली गई है, जिससे जियोथर्मल पावर प्लांट की स्थापना की योजना बनाई जा रही है। यह उपलब्धि न केवल भारत के लिए, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।
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भारत की नई उपलब्धि: लद्दाख में जियोथर्मल कुआं

लगभग 1950 के दशक में, चीन ने लद्दाख के अक्सई चिन्ह क्षेत्र में सड़क निर्माण शुरू किया था, जिसके परिणामस्वरूप भारत के लगभग 42,000 किमी क्षेत्र पर उसका कब्जा हो गया। उस समय के प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने इस क्षेत्र को बंजर बताया था, जहां घास भी नहीं उगती थी। लेकिन अब भारत ने लद्दाख में दो अद्भुत उपलब्धियां हासिल की हैं।


जवाहरलाल नेहरू द्वारा बंजर कहे गए क्षेत्र में अब 800 किमी में घास उगाई जा रही है। इसके अलावा, लद्दाख के उस क्षेत्र में, जहां तापमान -25 डिग्री तक पहुंच जाता है, 1000 मीटर गहरा गड्ढा खोदा गया है।


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इस गड्ढे से निकले परिणाम ने सभी को चौंका दिया है। भारत की सरकारी कंपनी ओएनजीसी ने लद्दाख की पुगा घाटी में 1000 मीटर गहराई पर एक जियोथर्मल कुआं सफलतापूर्वक खोदा है। 4400 मीटर से अधिक ऊंचाई पर स्थित इस बर्फीले क्षेत्र में, भारत ने जमीन के गर्भ से उबलता हुआ पानी और भाप निकालने में सफलता प्राप्त की है। अब इस भाप का उपयोग करके जियोथर्मल पावर प्लांट बनाने की योजना बनाई जा रही है। यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, खासकर चीनी सीमा के निकट।


यह भारत का सबसे गहरा जियोथर्मल कुआं है और इसके साथ ही भारत का पहला जियोथर्मल पावर प्लांट बनने की दिशा में कदम बढ़ाया जा रहा है।


जियोथर्मल प्लांट धरती की गहराई में उत्पन्न प्राकृतिक गर्मी का उपयोग करके बिजली उत्पन्न करता है। इसमें जमीन के नीचे से निकलने वाली भाप का उपयोग टरबाइन चलाने के लिए किया जाता है, जिससे निरंतर बिजली उत्पादन संभव होता है। वैज्ञानिक इन गर्म जल भंडारों तक पहुंचने के लिए गहरे कुएं खोदते हैं, और लद्दाख में ऐसा ही एक कुआं सफलतापूर्वक खोदा गया है।