लद्दाख में डेयरी क्षेत्र को नई दिशा देने के लिए आधुनिक संयंत्र की स्थापना
लद्दाख में डेयरी विकास की नई पहल
केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में श्वेत क्रांति को नई ऊंचाई पर ले जाने के उद्देश्य से केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को करगिल में 10,000 लीटर प्रतिदिन क्षमता वाले एक अत्याधुनिक डेयरी प्रसंस्करण संयंत्र का उद्घाटन किया। यह परियोजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'आत्मनिर्भर भारत' के दृष्टिकोण के तहत शुरू की गई है, जो लद्दाख के कठिन क्षेत्रों में दूध उत्पादकों की आय को बढ़ाने और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
अधिकारियों के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में कई नई पहलों की शुरुआत की गई है, जिनमें मोबाइल दूध परीक्षण प्रयोगशालाएं, आधुनिक दूध शीतलन प्रणाली और डेयरी अवसंरचना का विकास शामिल है। यह सब लद्दाख में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए किया जा रहा है। 10,000 लीटर प्रतिदिन क्षमता वाला यह संयंत्र लगभग 25 करोड़ रुपये की लागत से राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड की पूर्ण स्वामित्व वाली कंपनी द्वारा स्थापित किया जा रहा है।
यह परियोजना मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय के राष्ट्रीय डेयरी विकास कार्यक्रम के अंतर्गत कार्यान्वित की जा रही है, जिसमें 12.74 करोड़ रुपये का अनुदान और 10 करोड़ रुपये की सहायता राष्ट्रीय डेयरी विकास फाउंडेशन से प्राप्त की जा रही है। शेष राशि एलयूटीडीसीएफ फंड के माध्यम से उपलब्ध कराई जाएगी। यह संयंत्र 350 किलोवाट सौर ऊर्जा प्रणाली पर कार्य करेगा, जिससे इस ऊंचाई वाले क्षेत्र में स्वच्छ और टिकाऊ संचालन सुनिश्चित होगा।
दूध संग्रह के लिए आधुनिक मोबाइल 'मिल्क कलेक्शन' और 'कूलिंग सिस्टम' स्थापित किए जाएंगे, जिससे किसानों से सीधे दूध संग्रह, गुणवत्ता संरक्षण और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। अधिकारियों ने बताया कि ये कदम लद्दाख के डेयरी क्षेत्र के आधुनिकीकरण, किसानों की आय बढ़ाने और खरीद प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के व्यापक प्रयास का हिस्सा हैं। इसके साथ ही, बिजली से जुड़ी चुनौतियों को दूर करने और किसानों को समय पर डिजिटल भुगतान सुनिश्चित करने के उपाय भी किए जा रहे हैं।
भारतीय सेना के साथ नियमित दूध आपूर्ति व्यवस्था से इस क्षेत्र में डेयरी गतिविधियों को स्थिर बाजार मिला है, जिससे संचालन की विश्वसनीयता बढ़ी है। डिजिटल सुधारों के तहत एआई आधारित निगरानी प्रणाली, मोबाइल दूध संग्रह इकाइयां और जलवायु अनुकूल शीतलन समाधान लागू किए गए हैं, ताकि गुणवत्ता और पारदर्शिता बनी रहे। इन पहलों का असर अब दिखने लगा है। एक गांव के 74 किसानों से शुरू होकर अब यह नेटवर्क लगभग 1,700 किसानों तक पहुंच गया है। दैनिक दूध संग्रह लगभग 7,000 लीटर तक पहुंच गया है और किसानों को कुल भुगतान 15 करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है।
यह सौर ऊर्जा आधारित संयंत्र हजारों किसानों को प्रत्यक्ष लाभ देगा, उनकी आय बढ़ाएगा और स्थानीय कृषि मूल्य श्रृंखला को मजबूत करेगा। अधिकारियों ने बताया कि मोबाइल प्रयोगशालाओं की तैनाती, कोल्ड चेन नेटवर्क का विस्तार और डिजिटल ऑटोमेटेड मिल्क कलेक्शन सिस्टम को अपनाने जैसे कदम भी जारी हैं, जिससे दक्षता बढ़ेगी। इसके अलावा, पनीर और दही जैसे उत्पादों के जरिये मूल्य संवर्धन को बढ़ावा दिया जा रहा है। मदर डेयरी, सफल और धारा जैसे ब्रांडों के साथ साझेदारी कर उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण दुग्ध उत्पाद उपलब्ध कराने की योजना है। यह कार्यक्रम सहकारी ढांचे के तहत बेहतर प्रदर्शन करने वाले किसानों को सम्मानित करने के साथ-साथ ग्रामीण विकास, आय स्थिरता एवं जीवन स्तर सुधार की दिशा में एक व्यापक मॉडल के रूप में देखा जा रहा है, जो 'आत्मनिर्भर लद्दाख' और 'आत्मनिर्भर भारत' की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.
Addressing the first international exposition of the sacred relics of Lord Buddha in Ladakh. https://t.co/QC09TfrSIx
— Amit Shah (@AmitShah) May 1, 2026
