लखनऊ में शिक्षा का अधिकार अधिनियम का उल्लंघन: 12 स्कूलों पर कार्रवाई
लखनऊ में शिक्षा व्यवस्था पर कड़ी कार्रवाई
लखनऊ : उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शिक्षा व्यवस्था और गरीब बच्चों के अधिकारों से संबंधित एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। लखनऊ के जिलाधिकारी (DM) ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) के तहत चयनित बच्चों को अपने संस्थानों में प्रवेश न देने वाले निजी स्कूलों के खिलाफ सख्त कदम उठाने का निर्णय लिया है। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि ऐसे स्कूलों के खिलाफ अब सीधे एफआईआर (FIR) दर्ज की जाएगी। लखनऊ में 12 प्रमुख स्कूलों की पहचान की गई है, जिन्होंने इस सत्र में आरटीई के तहत एक भी बच्चे को प्रवेश नहीं दिया है।
इस गंभीर मुद्दे पर ध्यान देते हुए, जिलाधिकारी ने बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) को निर्देश दिए हैं कि शनिवार तक इन 12 डिफाल्टर स्कूलों को तीन दिन का अंतिम कारण बताओ नोटिस जारी किया जाए। यदि इस नोटिस की अवधि के बाद भी स्कूल प्रबंधन चयनित बच्चों को निशुल्क प्रवेश देने में विफल रहता है, तो बिना किसी अतिरिक्त समय के कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
12,500 बच्चों को मिला निशुल्क प्रवेश, प्रशासन की कार्रवाई तेज
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष लखनऊ जिले में आरटीई के तहत 16,000 से अधिक बच्चों का चयन लॉटरी के माध्यम से किया गया था। जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग के प्रयासों के चलते इनमें से 12,500 से अधिक बच्चों को विभिन्न निजी स्कूलों में सफलतापूर्वक निशुल्क प्रवेश दिया गया है। हालांकि, लगभग 2,500 बच्चों के अभिभावकों ने स्कूलों की दूरी के कारण प्रवेश लेने से मना कर दिया था।
अब बचे हुए बच्चों के दाखिले को सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन ने अपनी कार्रवाई को तेज कर दिया है। प्रशासन का स्पष्ट संदेश है कि शिक्षा के अधिकार कानून का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और गरीब बच्चों के अधिकारों का हनन करने वाले स्कूल प्रबंधकों को सजा का सामना करना पड़ेगा। इस आदेश के बाद लखनऊ के निजी स्कूल संचालकों में हड़कंप मच गया है।
