लखनऊ के स्कूल में किताबों की बिक्री का मामला, प्रधानाध्यापक निलंबित
लखनऊ में प्राथमिक विद्यालय की चौंकाने वाली घटना
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के मोहनलालगंज क्षेत्र में एक प्राथमिक विद्यालय से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां बच्चों की शिक्षा के लिए आई सरकारी किताबों को जरूरतमंद छात्रों को बांटने के बजाय कबाड़ी को बेच दिया गया। जब इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, तो शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया।
वीडियो से खुला मामला
यह घटना नेवाजखेड़ा प्राथमिक विद्यालय की है। वायरल वीडियो में देखा गया कि एक कबाड़ी स्कूल परिसर से लगभग छह बोरियों में भरी किताबें और अन्य सामान लेकर जा रहा है। इस दौरान गांव के कुछ बच्चे और ग्रामीणों ने कबाड़ी को रोककर बोरियां खुलवाईं। बोरियों में कक्षा 1 से 5 तक की नई किताबें पाई गईं। बताया जा रहा है कि इन किताबों का कुल वजन लगभग दो क्विंटल था। ग्रामीणों का आरोप है कि यह सब कुछ स्कूल के प्रधानाध्यापक की मौजूदगी में हुआ और जानबूझकर किताबें बेची गईं।
कबाड़ी ने स्वीकार की किताबें खरीदने की बात
मोहनलालगंज के खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) सुशील कनौजिया ने बताया कि उन्होंने खुद स्कूल जाकर पूरे मामले की जांच की। ग्रामीणों और कबाड़ी दोनों के बयान दर्ज किए गए। कबाड़ी ने स्वीकार किया कि उसने पहले रेट तय कर किताबें खरीदी थीं, लेकिन वीडियो वायरल होने के बाद किताबें वापस कर दी गईं। बीईओ ने प्रधानाध्यापक को नोटिस जारी कर पूछा है कि ये किताबें किस साल की थीं और स्कूल से कब-कब और क्या-क्या सामग्री बाहर भेजी गई।
प्रधानाध्यापक का निलंबन
बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) विपिन कुमार ने प्रारंभिक जांच में गंभीर लापरवाही मानते हुए प्रधानाध्यापक रविंद्र गुप्ता को निलंबित कर दिया है। बीएसए ने कहा कि कई स्कूलों में आज भी बच्चों को पूरी किताबें नहीं मिल पा रही हैं, ऐसे में अतिरिक्त किताबों को कबाड़ में बेचना बेहद गंभीर मामला है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि जांच में किसी और की भूमिका सामने आती है, तो उसके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।
शिक्षा व्यवस्था पर सवाल
इस घटना ने सरकारी स्कूलों में किताबों के वितरण और निगरानी व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। जहां एक ओर सरकार शिक्षा सुधार की बात कर रही है, वहीं इस तरह की लापरवाही बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ मानी जा रही है।
