रेनवाल मांजी में घायल ऊंट का सफल रेस्क्यू: समाजसेवी और एनजीओ की सराहनीय पहल

रेनवाल मांजी में एक घायल ऊंट का सफल रेस्क्यू किया गया, जिसमें समाजसेवी जितेंद्र शर्मा और हेल्प इन सफरिंग एनजीओ की टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ऊंट को गड्ढे से निकालने के लिए स्थानीय ग्रामीणों ने भी सहयोग किया। इस रेस्क्यू ने पशु कल्याण के प्रति समुदाय की जिम्मेदारी को उजागर किया। जानें इस प्रेरणादायक घटना के बारे में अधिक जानकारी।
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रेनवाल मांजी में घायल ऊंट का सफल रेस्क्यू: समाजसेवी और एनजीओ की सराहनीय पहल

घायल ऊंट का रेस्क्यू

रेनवाल मांजी, जयपुर 30 अगस्त 2025 - ग्राम पंचायत मोहब्बतपुरा में कौशल्या दास की बावड़ी के पास एक ऊंट, जिसे 'रेगिस्तान का जहाज' कहा जाता है, दो दिन पहले एक गड्ढे में गिरकर घायल हो गया। ऊंट के सिर में कीड़े लग गए थे, जिससे उसकी स्थिति गंभीर हो गई। समाजसेवी जितेंद्र शर्मा ने इस घटना की सूचना हेल्प इन सफरिंग एनजीओ को दी, जिसके बाद एनजीओ की टीम ने त्वरित कार्रवाई की।


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हेल्प इन सफरिंग की टीम, डॉ. अभिनव स्वामी के नेतृत्व में, जिसमें कंपाउंडर राजेंद्र खोखर, भगवान दास, दीपक राजावत, और शिव प्रसाद शामिल थे, तुरंत मौके पर पहुँची। ग्राम विकास अधिकारी शशिकांत शर्मा ने तुरंत जेसीबी की व्यवस्था की। एनजीओ की टीम और स्थानीय ग्रामीणों ने जेसीबी और रस्सों की मदद से घायल ऊंट को गड्ढे से सुरक्षित बाहर निकाला।


रेस्क्यू के बाद, हेल्प इन सफरिंग की टीम ने ऊंट का प्राथमिक उपचार किया। ग्रामीणों के सहयोग और एनजीओ की मेहनत से यह रेस्क्यू सफल रहा। इसके बाद घायल ऊंट को आगे के उपचार और देखभाल के लिए कैमल रेस्क्यू सेंटर, बस्सी भेजा गया।


समाजसेवी और ग्रामीणों की भूमिका
समाजसेवी जितेंद्र शर्मा की सूझबूझ और त्वरित सूचना के कारण इस रेस्क्यू को समय पर अंजाम दिया जा सका। ग्राम विकास अधिकारी शशिकांत शर्मा और स्थानीय ग्रामीणों ने भी इस कार्य में महत्वपूर्ण योगदान दिया। हेल्प इन सफरिंग एनजीओ की टीम के समर्पण और ग्रामीणों के सहयोग ने इस रेस्क्यू को एक प्रेरणादायक उदाहरण बना दिया।


हेल्प इन सफरिंग का योगदान
हेल्प इन सफरिंग एनजीओ लंबे समय से पशुओं की देखभाल और रेस्क्यू कार्यों में सक्रिय है। इस घटना में डॉ. अभिनव स्वामी और उनकी टीम ने पेशेवर ढंग से कार्य करते हुए राज्य पशु ऊंट की जान बचाई। एनजीओ ने न केवल प्राथमिक उपचार प्रदान किया, बल्कि ऊंट को सुरक्षित रेस्क्यू सेंटर तक पहुँचाने की व्यवस्था भी की।


यह रेस्क्यू कार्य न केवल पशु कल्याण के प्रति समुदाय की जिम्मेदारी को दर्शाता है, बल्कि सामूहिक प्रयासों और संगठनों के सहयोग की शक्ति को भी उजागर करता है। ग्रामीणों और हेल्प इन सफरिंग की इस पहल को स्थानीय समुदाय ने खूब सराहा।