रुबीना दिलैक ने सीसेक्शन के अनुभव पर साझा की महत्वपूर्ण बातें
रुबीना दिलैक का सीसेक्शन अनुभव
रुबीना दिलैक अक्सर मातृत्व के सफर के बारे में खुलकर बात करती हैं। हाल ही में, उन्होंने सीसेक्शन और इसके दौरान महिलाओं को होने वाली कठिनाइयों पर चर्चा की। उनका कहना है कि लोग इस प्रक्रिया को बहुत हल्के में लेते हैं।
रुबीना ने एक इंटरव्यू में अपने सीसेक्शन के अनुभव को साझा किया। उनकी बातें कई महिलाओं को इसलिए पसंद आईं क्योंकि उन्होंने मातृत्व के बाद के दर्द और भावनात्मक सफर को उजागर किया, जिसके बारे में अक्सर चर्चा नहीं होती।
उन्होंने बताया कि सीसेक्शन के दौरान बच्चे को जन्म देने से पहले शरीर की 7 परतों को काटा जाता है। भले ही डिलीवरी में केवल 10 मिनट लगें, लेकिन शरीर को फिर से सिलने में लगभग 45 मिनट लगते हैं। इसके बाद, शरीर को उस दर्द और ट्रॉमा से उबरने में काफी समय लगता है। रुबीना ने यह भी कहा कि इस प्रक्रिया के दौरान एक से डेढ़ लीटर दूध बह जाता है।
रुबीना ने बताया कि इस प्रक्रिया का महिलाओं के शरीर पर गहरा प्रभाव पड़ता है। काफी खून बहता है और लंबे समय तक टांके रहते हैं। उनके लिए सबसे कठिन बात यह थी कि उन्हें पहले से अंदाजा नहीं था कि सर्जरी के बाद की रिकवरी इतनी कठिन होगी।
उन्होंने एक मेडिकल चेकअप के दौरान हुई घटना को याद किया, जब डॉक्टर ने उनसे पूछा कि क्या उनकी कोई सर्जरी हुई है। सीसेक्शन का जिक्र करने से पहले वह थोड़ी हिचकिचाईं, क्योंकि उन्हें लगा कि शायद लोग इसे गंभीर सर्जरी नहीं मानते।
डॉक्टर ने तुरंत स्पष्ट किया कि सीसेक्शन एक गंभीर चिकित्सा प्रक्रिया है। यह बात उनके दिल में रह गई, क्योंकि इससे उन्हें एहसास हुआ कि समाज अक्सर महिलाओं के शरीर पर पड़ने वाले इस बड़े प्रभाव को सामान्य तरीके से देखता है।
रुबीना ने कहा कि कई महिलाओं से उम्मीद की जाती है कि वे डिलीवरी के बाद होने वाले दर्द और भावनात्मक असर को बिना कुछ कहे सहन कर लें।
अब इस अनुभव के बाद, सोशल मीडिया पर मातृत्व, डिलीवरी के बाद की रिकवरी और सीसेक्शन से गुजरने वाली महिलाओं के प्रति अधिक समझ और सहानुभूति की आवश्यकता पर चर्चा तेज हो गई है।
