रुपये की ऐतिहासिक गिरावट: डॉलर के मुकाबले 96 के स्तर को पार

भारतीय रुपये ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 96.14 के स्तर को पार कर लिया है, जो कि एक नया रिकॉर्ड है। इस गिरावट के पीछे मध्य पूर्व का जियोपॉलिटिकल संकट और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो डॉलर की कीमत 100 रुपये तक पहुंच सकती है। महंगाई का सीधा असर आम जनता की जेब पर पड़ेगा, जिससे पेट्रोल, डीजल और अन्य सामान महंगे हो जाएंगे। जानें इस स्थिति के पीछे के कारण और सरकार के प्रयासों के बारे में।
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रुपये की ऐतिहासिक गिरावट: डॉलर के मुकाबले 96 के स्तर को पार gyanhigyan

रुपये की गिरावट का नया रिकॉर्ड

अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया आज 96.14 के स्तर पर पहुंच गया है, जो कि एक नया रिकॉर्ड है। बुधवार को इसमें 50 पैसे की गिरावट आई थी, जबकि इससे पहले यह 95.64 पर बंद हुआ था। यह आंकड़ा केवल एक संख्या नहीं है, बल्कि यह महंगाई का संकेत है जो सीधे आम जनता की जेब पर असर डालने वाला है.


भारतीय मुद्रा पर दबाव

2026 की शुरुआत से भारतीय रुपया लगातार दबाव में है। दिसंबर 2025 में, रुपये ने पहली बार 90 का मनोवैज्ञानिक स्तर तोड़ा था। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो डॉलर की कीमत 100 रुपये तक पहुंच सकती है.


विदेशी तनाव का असर

इस गिरावट का मुख्य कारण मध्य पूर्व में चल रहा जियोपॉलिटिकल संकट है। अमेरिका और इजराइल के बीच तनाव ने वैश्विक बाजार को प्रभावित किया है। होर्मुज रूट में सप्लाई बाधित होने की आशंका के चलते निवेशक सुरक्षित ठिकाने की तलाश में हैं, जो वर्तमान में अमेरिकी डॉलर में नजर आ रहा है.


कच्चे तेल की कीमतें

भारत अपनी कच्चे तेल की 85% से अधिक खपत विदेशों से करता है। वर्तमान में, अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत 107 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर चुकी है। महंगे तेल का मतलब है कि भारत को इसे खरीदने के लिए अधिक डॉलर खर्च करने होंगे.


विदेशी निवेशकों की बिकवाली

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के साथ-साथ विदेशी संस्थागत निवेशक भारतीय शेयर बाजार से तेजी से पैसा निकाल रहे हैं। हाल ही में, विदेशी निवेशकों ने 4,700 करोड़ रुपये से अधिक के शेयर बेचे हैं, जिससे रुपये की वैल्यू में गिरावट आई है.


महंगाई का प्रभाव

रुपये की गिरावट का सबसे बड़ा असर आम जनता पर पड़ेगा। देश में थोक महंगाई दर पहले से ही उच्चतम स्तर पर है। डॉलर महंगा होने से 'इंपोर्टेड इन्फ्लेशन' का खतरा बढ़ गया है, जिससे पेट्रोल, डीजल और अन्य सामान महंगे हो जाएंगे.


सरकार के प्रयास

बिगड़ती स्थिति को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद मोर्चा संभाला है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि वे विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने के लिए फिजूलखर्ची रोकें। इसके साथ ही, सरकार ने कीमती धातुओं के आयात पर टैरिफ बढ़ा दिया है.


रुपये और डॉलर का सफर

रुपये की गिरावट का यह सफर अभी खत्म नहीं हुआ है। ट्रेडर्स का मानना है कि आने वाले दिनों में रुपये में और गिरावट देखने को मिल सकती है.