रीठा: बवासीर और अन्य रोगों के लिए प्रभावी औषिधि
रीठा, जिसे अरीठा भी कहा जाता है, एक प्राकृतिक औषिधि है जो बवासीर और अन्य कई रोगों के उपचार में सहायक है। इस लेख में, हम रीठा के औषधीय गुणों, इसे बनाने की विधि, सेवन के तरीके और इसके सेवन के दौरान ध्यान रखने योग्य बातों के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे। जानें कैसे यह साधारण फल आपकी स्वास्थ्य समस्याओं का समाधान कर सकता है।
| Apr 25, 2026, 07:06 IST
रीठा का औषधीय उपयोग
- यह नुस्खा एक महात्मा से प्राप्त हुआ है, और प्रयोग करने पर 100 में से 90 मरीजों को लाभ मिला है, यानी इसकी सफलता दर 90 प्रतिशत है। आइए जानते हैं इस नुस्खे के बारे में।
औषिधि बनाने की विधि:
- रीठा के फल से बीज निकालकर शेष भाग को लोहे की कढ़ाई में डालें और तब तक गर्म करें जब तक वह कोयला न बन जाए। जब यह जलकर कोयले जैसा हो जाए, तो इसे आंच से उतारकर समान मात्रा में पपड़िया कत्था मिलाकर कपड़े से छानकर चूर्ण बना लें। आपकी औषिधि तैयार है।
औषिधि का सेवन कैसे करें:
- इस औषिधि का एक रत्ती (125 मिलीग्राम) मक्खन या मलाई के साथ सुबह-शाम सेवन करें। यह प्रक्रिया सात दिनों तक जारी रखें।
- सात दिन तक इस औषिधि का सेवन करने से कब्ज, बवासीर की खुजली, और बवासीर से खून बहने की समस्या में राहत मिलती है।
- यदि कोई व्यक्ति इस रोग से स्थायी रूप से छुटकारा पाना चाहता है, तो उसे हर छह महीने में फिर से इसी प्रकार का सात दिन का कोर्स करना चाहिए।
रीठा के अन्य नाम:
- संस्कृत – अरिष्ट, रक्तबीज, मागल्य
- हिन्दी – रीठा, अरीठा
- गुजराती – अरीठा
- मराठी – रीठा
- मारवाड़ी – अरीठो
- पंजाबी – रेठा
- कर्नाटक – कुकुटेकायि
सेवन के दौरान परहेज़:
- ध्यान रखें कि औषिधि लेते समय सात दिन तक नमक का सेवन न करें। देशी उपचार में पथ्य का विशेष ध्यान रखा जाता है, कई रोगों में दवा से अधिक पथ्य आहार प्रभावी होता है।
सेवन के दौरान क्या खाएं:
- मुंग या चने की दाल, कुल्थी की दाल, पुराने चावलों का भात, बथुआ, परवल, तोरई, कच्चा पपीता, गुड़, दूध, घी, मक्खन, काला नमक, सरसों का तेल, पका बेल, सोंठ आदि का सेवन करें।
सेवन के दौरान क्या न खाएं:
- उड़द, धी, सेम, भारी और भुने पदार्थ, घिया, धूप या ताप, अपानुवायु को रोकना, साइकिल चलाना, सहवास, कड़े आसन पर बैठना आदि बवासीर के लिए हानिकारक हैं।
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रीठा के फायदे:
- रीठा के छिलके का उपयोग बवासीर, जुकाम, कान में मैल जमना, और अन्य कई रोगों के उपचार में किया जाता है।
