रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में ऐतिहासिक गिरावट, एक लाख करोड़ का नुकसान
रिलायंस के शेयरों में गिरावट का कारण
रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में पिछले 18 महीनों में सबसे बड़ी गिरावट देखी जा रही है।
एशिया के सबसे धनी उद्योगपति मुकेश अंबानी की कंपनी ने हाल ही में रूस से कच्चा तेल खरीदने के मुद्दे पर बाजार में हलचल मचाई। एक रिपोर्ट के अनुसार, तीन जहाज रूसी कच्चा तेल लेकर जामनगर रिफाइनरी की ओर बढ़ रहे थे। इसके बाद, अमेरिकी राष्ट्रपति ने भारत को चेतावनी दी कि यदि उसने रूस से तेल खरीदना जारी रखा, तो और टैरिफ लगाए जाएंगे।
इसके तुरंत बाद, रिलायंस ने अपने ट्विटर हैंडल पर स्पष्ट किया कि उसने पिछले तीन हफ्तों में रूस से कोई कच्चा तेल नहीं खरीदा है और जनवरी में भी ऐसा होने की संभावना नहीं है। कंपनी ने मीडिया रिपोर्ट्स को खारिज कर दिया।
हालांकि, इस सफाई का असर कंपनी के शेयरों पर पड़ा, जो 5 प्रतिशत से अधिक गिर गए। यह गिरावट जून 2024 के लोकसभा चुनावों के बाद की सबसे बड़ी गिरावट मानी जा रही है, जिससे रिलायंस की वैल्यूएशन में एक लाख करोड़ रुपये से अधिक की कमी आई है।
यह घटना केवल रिलायंस के लिए ही नहीं, बल्कि समग्र शेयर बाजार के लिए भी नकारात्मक साबित हुई है। सेंसेक्स में 485 अंकों की गिरावट आई है। आइए जानते हैं कि रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर किस स्तर पर कारोबार कर रहे हैं।
डेढ़ साल की सबसे बड़ी गिरावट
डेढ़ साल की सबसे बड़ी गिरावट
मंगलवार को बीएसई पर रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर 5 प्रतिशत गिरकर 1,497.05 रुपये पर पहुंच गए। यह गिरावट उस रिपोर्ट के खंडन के बाद आई, जिसमें कहा गया था कि रूसी कच्चे तेल से भरे तीन जहाज जामनगर रिफाइनरी की ओर बढ़ रहे हैं। कंपनी ने इस रिपोर्ट को “पूरी तरह से गलत” बताया। यह गिरावट 4 जून, 2024 के बाद से सबसे बड़ी है।
शेयर अपने 50-दिनों के मूविंग एवरेज से नीचे गिर गए हैं। आंकड़ों के अनुसार, रिलायंस का शेयर दोपहर 1:40 बजे 4.69 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1503.50 रुपये पर कारोबार कर रहा था। जबकि सुबह यह 1575.55 रुपये पर खुला था। एक दिन पहले यह 1577.45 रुपये पर बंद हुआ था। रिलायंस निफ्टी 50 पर सबसे अधिक दबाव डालने वाला शेयर बन गया, जिससे बेंचमार्क इंडेक्स में लगभग 82 अंकों की गिरावट आई।
रिलायंस को एक लाख करोड़ से ज्यादा का नुकसान
रिलायंस को एक लाख करोड़ से ज्यादा का नुकसान
शेयरों में गिरावट के कारण रिलायंस इंडस्ट्रीज को एक लाख करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है। बीएसई के आंकड़ों के अनुसार, सोमवार को कंपनी का मार्केट कैप 21,34,679.89 करोड़ रुपये था, जो मंगलवार को घटकर 20,25,878.81 करोड़ रुपये पर आ गया। इसका मतलब है कि कंपनी को कारोबारी दिन के दौरान 1,08,801.08 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
कंपनी की सफाई
कंपनी की सफाई
कंपनी ने X पर जारी बयान में कहा कि उसके जामनगर रिफाइनरी को पिछले तीन हफ्तों में रूस से कोई तेल की खेप नहीं मिली है और जनवरी में भी ऐसा होने की संभावना नहीं है। रिलायंस ने कहा कि उसके खंडन को नजरअंदाज करने से उसे गहरा दुख हुआ है, जिससे उसकी छवि को नुकसान पहुंचा है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में, केप्लर के आंकड़ों का हवाला देते हुए, यह सुझाव दिया गया था कि रूस से कच्चे तेल से लदे तीन जहाज रिलायंस की जामनगर रिफाइनरी की ओर जा रहे थे। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद रियायती दरों पर रूस से तेल खरीदने वाली रिलायंस ने अब इस तरह की खरीद रोक दी है।
कितनी कम हुई रूस तेल की सप्लाई
कितनी कम हुई रूस तेल की सप्लाई
रॉयटर्स के अनुसार, रिलायंस द्वारा रूसी कच्चे तेल का आयात बंद करने के बाद, जनवरी में भारत के रूस से तेल आयात में और गिरावट आने की संभावना है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अमेरिका और यूरोपीय संघ द्वारा लगाए गए कड़े प्रतिबंधों के कारण रूस से भारत को तेल की सप्लाई पहले ही धीमी हो चुकी है। दिसंबर में आयात तीन साल के निचले स्तर पर लगभग 12 लाख बैरल प्रति दिन तक गिर गया, जो जून में लगभग 20 लाख बैरल प्रति दिन के उच्चतम स्तर से लगभग 40 प्रतिशत कम है.
