राहुल गांधी ने युवा प्रदर्शनकारियों से की मुलाकात, पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल

दिल्ली में राहुल गांधी ने युवा प्रदर्शनकारियों से मुलाकात की, जिन्होंने पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर आरोप लगाए। प्रदर्शनकारियों ने हिरासत के दौरान दुर्व्यवहार का दावा किया, जबकि राहुल ने निष्पक्ष जांच की मांग की। इस विवाद का संबंध मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शनों से है। जानें इस मामले में क्या हुआ और आगे की संभावनाएं क्या हैं।
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दिल्ली में प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई पर चर्चा


दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए प्रदर्शनकारियों से मुलाकात की। 14 अक्टूबर 2026 को, राहुल गांधी घायल प्रदर्शनकारियों के साथ मीडिया के सामने आए और उनके आरोपों को लेकर पुलिस की भूमिका पर चर्चा की। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि हिरासत के दौरान उनके साथ मारपीट की गई और उन्हें शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और पुलिस का पक्ष जानना आवश्यक है।


प्रदर्शनकारियों का कहना है कि हाल के विरोध प्रदर्शनों में कई छात्रों को हिरासत में लिया गया था। उनका आरोप है कि हिरासत के बाद बसों और पुलिस के अन्य स्थानों पर उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया। कुछ ने शारीरिक चोटों का भी जिक्र किया। एक महिला प्रदर्शनकारी ने कहा कि पुलिस हिरासत के दौरान उसके साथ मारपीट की गई। वहीं, अन्य युवा प्रदर्शनकारियों ने भी पुलिसकर्मियों द्वारा अनुचित व्यवहार का आरोप लगाया।


राहुल गांधी ने प्रदर्शनकारियों की बातें सुनते हुए पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि युवाओं की आवाज को दबाना नहीं चाहिए और कथित दुर्व्यवहार की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से अपील की कि वे घटनाओं से संबंधित वीडियो और अन्य सबूत सुरक्षित रखें, ताकि जरूरत पड़ने पर कानूनी कार्रवाई में पेश किया जा सके। उन्होंने दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।


इस दौरान, राहुल ने केरल की छात्रा अथिरा का भी उल्लेख किया, जो दिल्ली विश्वविद्यालय में पढ़ाई कर रही हैं। राहुल और प्रदर्शनकारियों के अनुसार, पुलिस कार्रवाई के दौरान अथिरा को चोटें आईं और उन्होंने सुनने की क्षमता में कमी की भी शिकायत की। चोटों की प्रकृति और उनके कारणों की आधिकारिक पुष्टि जांच और चिकित्सकीय दस्तावेजों के आधार पर ही हो सकेगी।


यह विवाद मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन और चुनावी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के मुद्दों के बीच उठ रहा है। विपक्षी दल और कुछ प्रदर्शनकारी मतदाता सूची में बदलाव को लेकर चिंतित हैं और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने मतदाता सूची से संबंधित आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि जिन पात्र मतदाताओं के नाम छूट गए हैं, वे निर्धारित प्रक्रिया के तहत पुनः पंजीकरण करा सकते हैं।


जंतर-मंतर को आधिकारिक प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाए जाने के बावजूद विरोध प्रदर्शनों को लेकर राजनीतिक और कानूनी बहस जारी है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उन्हें शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने का अवसर मिलना चाहिए। वहीं, प्रशासन की ओर से लागू नियमों और अनुमति की शर्तों का पालन भी आवश्यक है।


इस मामले में प्रदर्शनकारियों द्वारा लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच महत्वपूर्ण है। यदि हिरासत के दौरान मारपीट या अन्य दुर्व्यवहार की पुष्टि होती है, तो संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही, जांच पूरी होने से पहले किसी भी आरोप को अंतिम रूप से सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता। आने वाले दिनों में पुलिस का आधिकारिक पक्ष, चिकित्सकीय रिपोर्ट और उपलब्ध वीडियो साक्ष्य इस विवाद की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।