राहुल गांधी ने जलवायु कार्यकर्ता के खिलाफ कार्रवाई की निंदा की

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को दिल्ली के जंतर-मंतर से हटाए जाने की आलोचना की है। उन्होंने केंद्र सरकार पर छात्रों की आवाज़ों को दबाने का आरोप लगाया और शिक्षा प्रणाली में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया। गांधी ने पेपर लीक और छात्रों की आत्महत्या जैसे मुद्दों को उठाते हुए कहा कि ये भारत के भविष्य के लिए गंभीर चुनौतियाँ हैं। उनका यह बयान 'छात्रों की गूंज' रैली के बाद आया, जहाँ उन्होंने शिक्षा में बड़े बदलावों की मांग की।
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राहुल गांधी की प्रतिक्रिया

कांग्रेस के नेता राहुल गांधी ने शनिवार को जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को दिल्ली के जंतर-मंतर से हटाए जाने की कड़ी आलोचना की, जहां वे भूख हड़ताल पर थे। उन्होंने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि वह छात्रों के मुद्दों को उठाने वाली आवाजों को दबाने का प्रयास कर रही है। लोकसभा में विपक्ष के नेता ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार के मूल सिद्धांत असत्य और हिंसा हैं। गांधी ने कहा कि जब सोनम वांगचुक अहिंसक भूख हड़ताल पर थे, तब उन्हें वहां से हटाना गलत था। वांगचुक के विरोध को शिक्षा प्रणाली से जुड़ी गंभीर चिंताओं से जोड़ते हुए गांधी ने कहा कि पेपर लीक, शिक्षा की बढ़ती लागत और छात्रों की आत्महत्या भारत के भविष्य के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से हैं। 


छात्रों की आवाज़

उन्होंने #ChhatronKiGoonj हैशटैग का उपयोग करते हुए कहा कि कोई भी शक्ति भारत के छात्रों और उनके समर्थकों को इन मुद्दों को उठाने से नहीं रोक सकती। यह बयान देहरादून में 'छात्रों की गूंज' रैली में गांधी के संबोधन के एक दिन बाद आया है, जहां उन्होंने भारत की शिक्षा और परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधारों की मांग की थी। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी राजनीतिक दल या संगठन को शिक्षण संस्थानों पर नियंत्रण नहीं होना चाहिए और पेपर लीक की समस्या से निपटने के लिए व्यापक राजनीतिक सहमति की आवश्यकता है। रैली में गांधी ने आरोप लगाया कि परीक्षा प्रश्नपत्र लीक होने से लगभग 75 लाख छात्र प्रभावित हुए हैं। उन्होंने कहा कि यह समस्या कई हितधारकों के भ्रष्ट तंत्र के कारण है, जिसमें कोचिंग सेंटर, परीक्षा केंद्र, प्रश्नपत्र तैयार करने वाले, परिवहनकर्ता, राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) और केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय शामिल हैं।


परीक्षा प्रणाली में सुधार की आवश्यकता

गांधी ने देश की परीक्षा प्रणाली में सुधार की आवश्यकता पर जोर देते हुए मौजूदा मॉडल को पुराना और छात्रों के बजाय परीक्षा पर अत्यधिक केंद्रित बताया। उनके अनुसार, वर्तमान परीक्षक-केंद्रित और सरकार-केंद्रित दृष्टिकोण को छात्र-केंद्रित ढांचे से बदलना चाहिए, जिसमें सुरक्षित प्रश्न बैंक और प्रौद्योगिकी-आधारित यादृच्छिक प्रश्नपत्र हों, जो जीएमएटी जैसी अंतरराष्ट्रीय मानकीकृत परीक्षाओं के समान हों।